डीजे और ढोल की धुन पर थिरके श्रद्धालुगण, धूमधड़ाके के साथ घर में विराजे गणपति

 
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मेरठ। आज महानगर में चारों ओर गणेश चतुर्थी की धूम रही। श्रद्धालुगणों ने गाजे-बाजे के साथ गणपति की सवारी निकाली और डीजे-ढोल की धुन पर खूब डांस किया। कोरोना महामारी में भी गणेश उत्सव पर कोई खास फर्क पड़ता हुआ नहीं दिखाई दिया है। लोगों ने आज से 9 दिन के लिए घर में बप्पा को विराजमान किया और पूजा-अर्चना की। महानगर में जगह-जगह भक्त गणेश की मूर्ति को अपने घर गाजे-बाजे के साथ लेकर जाते दिखाई दिए। इस दौरान खूब नाच गाना हुआ और सब ने गणपति बप्पा मोरिया का उद्घोष किया।  
नौ दिनों तक होगी भगवान गणेश की पूजा-अर्चना
बता दें कि आज देश के हर कोने में भगवान गणेश के आने की खुशी में लोग नाच-गा रहे हैं। आज से लेकर नौ दिनों तक भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करेंगे साथ ही उनके भजनों से गणेश उत्सव में चार चांद लगा देंगे। इसकी तैयारी भक्तजन बहुत दिनों से कर रहे हैं। भक्तों ने गणेश बप्पा की मूर्ति को अपने घर में विराजमान किया। साथ ही इस दौरान भक्तों में बप्पा को घर ले जाने की खुशी दिखाई दी। इन दिनों में आस-पास के लोग बप्पा के दर्शन करने पहुंचते हैं। साथ ही इन दिनों भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाया जाता है। क्योंकि उन्हें मोदक बहुत प्रिय हैं, चाहें उन्हें छप्पन भोग लगा दो, लेकिन वह सब बिना मोदक के अधूरे हैं। इसके साथ ही नौ दिन बाद बप्पा की प्रतिमा को ठीक उसी प्रकार गाजे-बाजे के साथ तालाब या नदी में विसर्जित किया जाता है, जिस प्रकार उन्हें घर में विराजमान करने से पहले किया जाता है।
मान्यता के अनुसार
शिवपुराण के अनुसार मान्यता है कि माता पार्वती ने स्नान करने से पहले अपनी मैल से एक बालक को बनाकर अपना द्वारपाल बनाया था। जिसके पश्चात् भगवान शंकर माता पार्वती के कक्ष में जाने का प्रयास करते हैं, लेकिन बालक उन्हें द्वार पर ही रोक देता है। जिससे भगवान शिव क्रोधित हो जाते हैं और दोनों के बीच युद्ध शुरू हो जाता है। इस दौरान भगवान शिव बालक पर त्रिशूल से प्रहार कर देते है, जिससे बालक का सिर धड़ से अलग हो जाता है। जिससे माता पार्वती क्रुद्ध हो उठी और उन्होंने प्रलय करने की छान ली। जिसके बाद देवताओं ने उन्हें जगदम्बा की स्तुति करके शांत किया। इसके बाद शिवजी के निर्देश पर भगवान विष्णु उत्तर दिशा में सबसे पहले मिलने वाले जीव हाथी के बच्चे का सिर काटकर ले आए। मृत्युंजय रुद्र ने गज के उस मस्तक को बालक के धड पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया। जिसके बाद सभी देव और देवताओं ने बालक को वरदान दिए। साथ ही शिव भगवान ने बालक से कहा कि तू सबका पूज्य बनकर मेरे समस्त गणों का अध्यक्ष होगा। जिसके चलते आज भगवान गणेश को सभी ने अपने घरों में पूजा के स्थान पर स्थापित किया है।

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