चुनावी ड्यूटी कटवाने को कैसे कैसे जतन कर रहे सरकारी मुलाजिम, पढ़िए यहाँ

 
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मेरठ। विधानसभा चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती पहले ही जिला प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। बावजूद इसके कोई सास के बीमार होने तो कोई पुरानी जान-पहचान का हवाला देकर चुनाव ड्यूटी से मुक्त होने की जुगत लगा रहा है।
पंचायत चुनाव के दौरान कोरोना संक्रमण से पीड़ित कर्मियों की संख्या अधिक थी। इस कारण मुजफ्फरनगर व बागपत से कर्मचारियों को बुलाकर चुनाव प्रक्रिया को पूर्ण कराया गया था। पंचायत चुनाव से सबक लेते हुए अतिरिक्त सतर्कता के साथ विधानसभा चुनाव संपन्न कराने के लिए कर्मियों की ड्यूटी लगाई जा रही है और टीकाकरण के साथ बूस्टर डोज भी दी जा रही है। इसके बाद भी विभिन्न विभागों के कर्मचारी बीमारी से लेकर पुरानी पहचान का हवाला देकर ड्यूटी कटवाने के लिए विकास भवन के चक्कर काट रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की कई शिक्षिकाओं ने अपनी सास व मां के बीमार होने का हवाला देकर ड्यूटी से मुक्त करने का आग्रह किया है। वहीं एक सरकारी शिक्षक ने तो घर में बच्चों को संभालने के लिए ड्यूटी कटवाने को आवेदन किया है। इसके अलावा एक महिला ने ससुर की देखभाल के लिए चुनावी ड्यूटी कटवाने को प्रार्थना पत्र दिया है।
सीडीओ शशांक चौधरी ने बताया कि बीमार कर्मियों के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। पड़ताल के बाद ही किसी को ड्यूटी से मुक्त किया जाएगा।

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