मेरठः वैक्सीन के असर ने कम किया डेल्टा वेरियेंट का खतरा, तीसरी लहर में संक्रमितों की संख्या कम होने का अनुमान

 
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मेरठ। मेरठ सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुटाए गए नमूनों की जीनोम सिक्वेंसिंग से पता चलता है कि कोरोना वायरस का डेल्टा वेरियेंट (B1617.2) ही कोविड-19 महामारी का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। जीनोम सिक्वेंसिंग के नतीजे यह भी बताते हैं कि वैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ उच्चस्तरीय सुरक्षा प्रदान करता है। ध्यान रहे कि डेल्टा वेरियेंट वायरस के अन्य वेरियेंट के मुकाबले कहीं ज्यादा संक्रामक और खतरनाक है। ये कहना है मेरठ में नोडल अधिकारी रहे डा सूर्यकांत का। उन्होंने बताया कि मई-जून के महीनों में की गई जीनोम सिक्वेंसिंग के नतीजे बताते हैं कि 87% संक्रमण डेल्टा वेरियेंट के कारण ही हो रहा है। वहीं, अमेरिका 83% संक्रमण का कारण यह वेरियेंट है। वैक्सीन लेने के बाद संक्रमित होने वाले ज्यादातर लोगों में डेल्टा वेरियेंट का असर ही पाया जा रहा है। हालांकि, वैक्सीन के असर में डेल्टा वेरियेंट का खतरा बहुत घट जाता है और संक्रमित होने वालों में बहुत कम लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आती है। वैक्सीन के बाद संक्रमण से मौतों का आंकड़ा तो और भी कम है।
वैक्सीन की जद में आकर कमजोर पड़ रहा डेल्टा वेरियेंट
उन्होंने बताया कि अब तक के आंकड़े बताते हैं कि वैक्सीन लेने के बाद संक्रमित हो रहे सिर्फ 9.8% लोगों को ही भर्ती होने की जरूरत पड़ रही है जबकि उनकी मौतों का आंकड़ा सिर्फ 0.4% है। डा0 सूर्यकांत ने यह भी बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की तरफ से कराए गए हालिया सीरो सर्वे से पता चला है कि देश की करीब एक तिहाई(33%)आबादी पर संक्रमण का खतरा अब भी बना हुआ है।
कोविड प्रॉटोकॉल और टीकाकरण बहुत ज्यादा :—
वहीं आईएमए ने टीकाकरण और कोविड प्रॉटोकॉल का पालन करने पर जोर दिया है। उसने कहा, ‘डेल्टा का प्रकोप देशभर में जारी है। आबादी के एक वर्ग पर इसका खतरा अब भी बना हुआ है। संक्रमण पर नियंत्रण पाने के लिए टीकाकरण और लोगों का उचित व्यवहार बहुत मायने रखता है।’

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