रैपिड रेल निर्माण कर रही एनसीआरटीसी पर प्रदूषण ​विभाग ने ठोका 25 लाख का जुर्माना

 
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मेरठ। एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अब तक करोड़ों रुपये का जुर्माना विभिन्न प्राइवेट और सरकारी संस्थानों पर लगाया जा चुका है। लेकिन इसके बाद भी प्रदूषण कम नहीं हो रहा। गाजियाबाद निगम और जीडीए पर जुर्माना लगाने के बाद अब क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रैपिड रेल का निर्माण कार्य कर रही एनसीआरटीसी पर 25 लाख का जुर्माना लगाया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि रैपिड रेल निर्माण के दौरान प्रदूषण फैल रहा है।
दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल का निर्माण कार्य कर रही एनसीआरटीसी यानी नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना क्षेत्री प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लगाया है। प्रदूषण बोर्ड का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान शहर में धूल उड़ाने और प्रदूषण फैलाने पर यह कार्रवाई की गई। वहीं दूसरी ओर धीरखेड़ा स्थित एक एक केमिकल फैक्टरी पर 25 लाख का जुर्माना लगाया है।
रैपिड रेल के निर्माण कार्यों के दौरान उड़ रही धूल पेड़ों के पत्तों और शाखाओं पर भी जम रही है। वहीं इससे हाइवे पर भी प्रदूषण फैल रहा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डा0 योगेंद्र कुमार ने बताया कि ने बताया कि 9, 21 और 22 नवंबर को रैपिड रेल के कामों का निरीक्षण किया गया था। उस दौरान मिली खामियां दुरुस्त करने के लिए नोटिस दिया गया था। लेकिन इसके बाद भी किसी प्रकार का कोई सुधार नहीं हुआ। इस संबंध में नगरायुक्त ने भी निरीक्षण कर एनसीआरटीसी और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र भेजा था। इसी आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान डस्ट सड़क पर डाली हुई है। ट्रकों के आवागमन से धूल उड़ रही है। ट्रक यार्ड कच्चे हैं, हवा चलने पर धूल उड़ती है। पानी का छिड़काव सही से नहीं हो रहा है। पेड़ों पर भी धूल जमी है। माल ले जाते हुए शताब्दीनगर क्षेत्र की सड़कें तोड़ दीं, इससे प्रदूषण हो रहा है।
वहीं दूसरी ओर धीरखेड़ा स्थित एक केमिकल फैक्टरी का वेस्ट मटेरियल खुले में ही डाला जा रहा था। वेस्ट मेटेरियल को ढककर नहीं रखा गया था। जिस कारण से वहां पर वायु प्रदूषण की गुणवत्ता खराब हो रही थी। फैक्टरी पर भी 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर दोनों की रिपोर्ट बनाकर बोर्ड मुख्यालय को भेज दी गई है।

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