गांव में नहीं है शमशान, टेंट लगाकर करना पड़ता है दाह संस्कार

 
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मेरठ। चुनावी रैलियों में श्मशान और कब्रिस्तान पर भले ही खूब बातें होती हों पर मेरठ के दौराला ब्लॉक के अख्तियारपुर गांव में आज भी श्मशान नहीं है। दाह संस्कार के लिए ग्रामीणों को काली नदी किनारे जाना पड़ता है। बरसात के बीच एक बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार करने के लिए गांव के लोगों को काली नदी किनारे टेंट लगाना पड़ा। गांव के ही एक किसान ने इसका वीडियो वायरल कर गांव का यह दर्द साझा किया है।  
मेरठ में नेशनल हाईवे 58 से महज पांच किमी दूर करीब ढाई हजार की आबादी वाला अख्तियारपुर गांव है। शनिवार को गांव निवासी बलेश्वर प्रजापति की पत्नी बाला की बीमारी के चलते मौत हो गई। तेज बारिश होने के कारण परिजनों के सामने समस्या आई। बारिश थमी तो परिजनों ने काली नदी किनारे टेंट लगाया और बाला अंतिम संस्कार किया। ग्रामीणों ने कहा कि गांव में आज तक श्मशान के लिए जगह ही नहीं छोड़ी गई।  
अंतिम संस्कार के दौरान के ही एक किसान ने महिला की चिता के सामने एक वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में गांव निवासी समाजसेवी रणसिंह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि यह कैसी व्यथा है। श्मशान न होने पर टेंट लगाकर शव का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। उन्होंने गांव में श्मशान बनाने की मांग की।   
वहीं ग्राम प्रधान शशि रानी का कहना है कि गांव में श्मशान बनाना पहली प्राथमिकता है। इसे लेकर ब्लॉक स्तर पर बात की गई है। आदर्श आचार संहिता खत्म होते ही श्मशान बनाने का कार्य किया जाएगा। हम ग्रामीणों का दुख समझते हैं।

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