बहुमंजिला इमारत से कूदकर जान देने वाली कांस्टेबल की बेटी का शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा
मुरादाबाद । मुरादाबाद के थाना सिविल लाइन क्षेत्र स्थित नवी वाहिनी पीएसी कैंपस में हेड कांस्टेबल की मानसिक रोग से ग्रस्त बेटी ने शनिवार सुबह योग करने की बात कह कर पीएसी कैंपस में निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत से कूदकर जान दे दी थी। सूचना पर सिविल लाइंस पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव भेज दिया […]
मुरादाबाद । मुरादाबाद के थाना सिविल लाइन क्षेत्र स्थित नवी वाहिनी पीएसी कैंपस में हेड कांस्टेबल की मानसिक रोग से ग्रस्त बेटी ने शनिवार सुबह योग करने की बात कह कर पीएसी कैंपस में निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत से कूदकर जान दे दी थी। सूचना पर सिविल लाइंस पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव भेज दिया था। आज रात्रि पोस्टमार्टम के बाद जब घर पहुंचा तो परिजनों ने दहाड़े मार-मार कर रोना पीटना शुरू कर दिया।
शाहजहांपुर निवासी मेवाराम 9 वीं वाहिनी पीएसी मुरादाबाद में तैनात हैं। मेवाराम की पत्नी प्रेमवती ग्राम प्रधान हैं और शाहजहांपुर स्थित पैतृक गांव में ही रहती हैं। मेवाराम परिवार के साथ 9 वीं वाहिनी पीएसी मुरादाबाद के कैंपस में स्थित सरकारी आवास में रहते है। उन्होंने बताया गया कि आज सुबह करीब साढ़े नौ बजे मेवाराम की छोटी बेटी पारुल (22 वर्ष) घर से योग करने की बात कहकर निकली थी।
जब वह तीन-चार घंटे तक घर नहीं लौटी तो परिजनों ने तलाश शुरू कर दी। भाई ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे की मदद से पता चला कि पारुल पीएसी कैंपस में निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत की ओर गई और वहां से नीचे कूद गई। जब परिवार के लोग वहां पहुंचे तो निर्माणाधीन बिल्डिंग के पास पारुल घायलावस्था में अचेत पड़ी थी।
मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा भर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था और रात्रि में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां