गंभीर लक्षण होने के बावजूद कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आए तो एचआरसीटी कराएं : डा. ढाका

 
गंभीर लक्षण होने के बावजूद कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आए तो एचआरसीटी कराएं : डा. ढाका

नोएडा। कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच आरटीपीसीआर टेस्ट (रीयल टाइम पॉलीमिरेज़ चेन रिएक्शन टेस्ट) की गलत रिपोर्ट्स चिंता का विषय बन गयी है। गंभीर लक्षण होने के बावजूद लोगों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ रही हैं। यह म्यूटेट वायरस बड़ी आसानी से पीसीआर टेस्ट को चकमा दे रहा है। इसलिए दोबारा टेस्ट कराने की बजाए लक्षण आने पर सीटी स्कैन कराना चाहिए। हर किसी को यह टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है। वास्तव में यह टेस्ट किन्हें कराने की जरूरत है? इसे कैसे रीड कर सकते हैं? और क्या करना चाहिए? इसके बारे में संयुक्त जिला अस्पताल के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एवं अवकाश प्राप्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. वीबी ढाका ने सोमवार को बातचीत में जानकारी दी।
 
क्या है एचआरसीटी रिपोर्ट 

डा. ढाका ने बताया- हाई रेजोल्यूशन कॉम्प्यूटेड टोमोग्राफी (एचआरसीटी) टेस्ट शरीर में वायरल इंफेक्शन की मौजूदगी का पता लगाने का एक तरीका है। दरअसल, छाती का स्कैन उन लोगों को कराना चाहिए जिनके शरीर में इंफेक्शन के संयुक्त लक्षण तो नजर आ रहे हैं, लेकिन आरटी-पीसीआर टेस्ट में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। एक तरफ जहां सामान्य आरएटी (रैपिड एंटीजन टेस्ट) और आरटी-पीसीआर में नाक या गले से लिए गए सैंपल के जरिए इंफेक्शन का पता लगाया जाता है। वहीं, एचआरसीटी टेस्ट एक डायग्नोस्टिक टूल है जो फेफड़ों की मौजूदा हालत के बारे में बताता है।
उन्होंने बताया- नया म्यूटेट वायरस शुरुआती दिनों में ही मरीज के फेफड़ों को नुकसान कर रहा है, ऐसे में सीटी स्कैन वायरल इंफेक्शन की गंभीरता और उसके प्रसार की सटीक जानकारी देने का काम कर रहा है। इतना ही नहीं, इससे मरीज को सही इलाज लेने में भी मदद मिलती है। एचआरसीटी स्कैन चिकित्सक की सलाह पर उस वक्त कराया जाना चाहिए जब किसी व्यक्ति के शरीर में कोविड-19 के हल्के या गंभीर लक्षण नजर आ रहे हों। यह उन लोगों के लिए भी एक मददगार डिटेक्टर है जो रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (सांस) जैसी अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं।
 
कैसे करें एचआरसीटी रिपोर्ट की जानकारी 

आमतौर पर एचआरसीटी टेस्ट की रीडिंग सीओआरएडी (कोविड रिपोर्टिंग एंड डाटा सिस्टम) स्कोर और सीटी स्कोर के माप के आधार पर की जाती है, जो कि आरटीपीसीआर में डिटेक्ट की गई सीटी वेल्यू से एकदम अलग होती है। सीटी स्कैन में सीओआरएडी के आधार पर शरीर में वायरल इंफेक्शन के स्तर को निर्धारित किया जाता है।
सीओआरएडी की स्कोरिंग एक से छह अंकों के बीच की जाती है, जिसमें एक का मतलब है- व्यक्ति कोविड निगेटिव है यानि उसके फेफड़ों का कार्य सामान्य है। दो से चार के बीच स्कोर वायरल इंफेक्शन की संभावना को दर्शाता है। स्कोर में पांच का मतलब कोविड-19 के हल्के लक्षण हैं। अगर रिपोर्ट में स्कोर छह आ रहा है तो इसका मतलब कोविड-19 से खतरा बहुत ज्यादा है। आरटीपीसीआर की पॉजिटिव रिपोर्ट और सांस में तकलीफ के आधार पर भी छह स्कोर दिया जाता है।
 
किसको कराना चाहिए एचआरसीटी स्कैन 

डा. ढाका का कहना है कि सभी लोगों को एचआरसीटी स्कैन की जरूरत नहीं होती है। लोग बीमारी का पहला लक्षण देखते ही छाती और फेफड़ों की स्कैनिंग के लिए पहुंच रहे हैं। यह फेफड़ों में इंफेक्शन की पुष्टि और उसकी गंभीरता को डिटेक्ट करता है। सांस संबंधित गंभीर लक्षण आने पर चिकित्सक की सलाह पर इसे कराना चाहिए। डा. ढाका के मुताबिक, यदि आरटीपीसीआर में किसी व्यक्ति की रिपोर्ट निगेटिव है और फिर भी उसके शरीर में कोरोना के कॉमन लक्षण नजर आ रहे हैं तो ऐसे में एचआरसीटी स्कैन टेस्ट मददगार साबित हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव है और एक सप्ताह बाद भी उसके लक्षणों में आराम नहीं है तो वह एचआरसीटी स्कैन करवा सकते हैं। उन्होंने बताया वायरस शुरुआती एक सप्ताह के बाद 'लोअर रेस्पिरेटरी एरिया' को प्रभावित करता है, ऐसी स्थिति में भी छाती का स्कैन सही काम करेगा।

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