अफसरों ने रिश्वत में वसूले 54 लाख करा दिए सरकारी खाते में जमा, दो बिजली अफसर हुए बर्खास्त 

 
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नोएडा। नोएडा में तैनात रहे अधिशासी अभियंता संजय शर्मा और मुख्य रोकड़िया महेश कुमार को 54 लाख के रिश्वत कांड में बर्खास्त कर दिया गया है। संजय शर्मा पर रिश्वत के पैसे महेश कुमार को रखने के लिए देने और यह रकम खंड कार्यालय के सरकारी खाते में जमा कराने के मामले में गाज गिरी है। जांच में दोनों को दोषी पाया गया है।

उप्र पावर कारपोरेशन के चेयरमैन एम. देवराज ने दोनों को बर्खास्त कर दिया है। वहीं, तीसरे आरोपी रामरतन को दोषमुक्त कर दिया गया है। पिछले साल मामले का खुलासा होने पर हड़कंप मच गया था। पश्चिमांचल से लेकर मुख्यालय तक जांच की गई। संजय शर्मा और महेश कुमार को दोषी पाए जाने पर बर्खास्त कर दिया गया। आदेश के मुताबिक जांच से स्पष्ट है कि यह धनराशि किसी गुप्त अभिप्राय से प्राप्त की गई थी, जो भ्रांतिवश खंड के बैंक खाते में जमा हो गई। 54 लाख रुपये की नकद धनराशि की कोई भी प्रविष्टि कैश बुक में न किए जाने तथा इस धनराशि की रसीद जारी न किए जाने के मामले में आरोपी दोषी पाए गए।

बिजली निगम के अधिशासी अभियंता बीएल मौर्या की ओर से सेक्टर-20 थाने में अधिशासी अभियंता संजय शर्मा, मुख्य रोकड़िया महेश कुमार और लेखाधिकारी रामरतन सुमन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप था कि तीनों ने 54 लाख कैश बैंक में जमा कराये। फर्जी दस्तावेज तैयार कर उक्त रकम को राजस्व खाते में नहीं दिखाया। मेरठ स्थित पश्चिमांचल कार्यालय के मुख्य अभियंता के नेतृत्व में गठित वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने मामले की जांच की थी। आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र देते हुए 15 फरवरी को एमडी अरविंद मल्लप्पा बंगारी को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके बाद एमडी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने यह रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी, जिस पर यह कार्रवाई हुई है।

संजय शर्मा अधिशासी अभियंता विद्युत नगरीय वितरण खंड द्वितीय नोएडा में 12 जून 2019 से 5 मार्च 2020 तक तैनात रहे। पांच अक्तूबर 2019 को विजया बैंक में 54 लाख रुपये जमा कराये गये। इसकी कोई रसीद व अन्य रिकॉर्ड खंड में नहीं था। यह मामला ऑडिट में पकड़ा गया। इस दौरान हुई जांच में वह अपने बयानों और उसके बाद किए गये प्रयासों में फंसते चले गये। पहले उन्होंने कहा कि यह धनराशि उपभोक्ताओं से अग्रिम भुगतान के रूप में ली गई है, जिसका बाद में समायोजन किया जाना था। इसके लिए पहले उन्होंने उपभोक्ताओं की संख्या 30 और फिर 46 बताई। जांच अधिकारियों को 32 उपभोक्ताओं के शपथ पत्र भी दे दिए। इन शपथ पत्रों में से अधिकांश एक ही जगह से बनवाये गये थे, जो एक ही क्रम में थे। एक ही उपभोक्ता के दो-दो शपथ पत्र भी दे दिए गए। जिन उपभोक्ताओं के द्वारा अग्रिम भुगतान करने की बात आरोपियों ने कही, वह लगातार अपना बिल जमा करते रहे और छोटे उपभोक्ता थे। जो इतना बिल जमा नहीं कर सकते थे। जो शपथ पत्र दिए गये, उनके अनुसार यह राशि 31.5 लाख ही बैठती थी। जांच अधिकारियों का कहना है कि इनको लेकर उठे सवालों के जवाब भी आरोपी नहीं दे सके।

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