प्रधानमंत्री ने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का किया शिलान्यास

 
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नोएडा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (एनआईए) का शिलान्यास किया। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री ने इससे पहले कार्यक्रम स्थल पर ही हवाई अड्डा परियोजना से जुड़ी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि जेवर और आसपास के युवाओं में आज एक विशेष प्रकार की चमक दिख रही है और चमक एक सपना पूरा होने की है। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डे से याहं की तमाम क्षमताओं को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि यहां 34 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। 2024 तक इसका पहला चरण पूरो हो जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में यह दिल्ली के एयरपोर्ट से भी आगे जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गति शक्ति मिशन के तहत एयरपोर्ट को सड़क, रेल, मेट्रो और बस से भी जोड़ा जाएगा। इससे देश की राजधानी से नजदीकी बढ़ जाएगी। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (एनआईए) परियोजना से वाणिज्य, कनेक्टिविटी और पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला देश का अकेला राज्य बन जाएगा। 5800 हेक्टेयर भूमि पर इस हवाई अड्डे का निर्माण होगा। यह देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। यहां एक साथ कई रनवे कार्यरत होंगे जिनकी क्षमता प्रतिवर्ष 22 करोड़ से अधिक यात्रियों के प्रबंधन की होगी। पहले चरण में 1334 हेक्टेयर भूमि पर एयरपोर्ट का निर्माण हो रहा है। यह दुनिया का पहला नेट जीरो एमशिन वाला देश का पहला एयरपोर्ट होगा। एयरपोर्ट को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण क्षेत्रीय संपर्क योजना के तहत दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे और प्रस्तावित खुर्जा-पलवल लिंक से जोड़ेगा। एयरपोर्ट को मेट्रो, हाई स्पीड रेल और एक्सप्रेस-वे जोड़ा जा रहा है। यह एनसीआर के लिए वरदान साबित होगा। यह एयरपोर्ट को मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी से जोडे़गा। इससे मथुरा, वृंदावन, आगरा जैसे पर्यटक स्थलों के व्यवसाय भी सशक्त होंगे। एयरपोर्ट के पहले चरण का विकास 5730 करोड़ रुपये के निवेश से होगा। इसके 2024 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है। एयरपोर्ट के दो टर्मिनलों का निर्माण चार चरणों में पूरा किया जाएग और इसकी क्षमता प्रति वर्ष सात करोड़ यात्रियों की होगी। पहले चरण में 28 एयरक्राफ्ट स्टेंड आगे चलकर चौथे चरण में 186 हो जाएंगे। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में यह दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा। इससे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दबाव कम होगा। यह रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है और दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़, आगरा, फरीदाबाद सहित शहरी आबादी और पड़ोसी इलाकों के लोगों की यात्रा सुगम बनाएगा। पहली बार भारत में किसी ऐसे हवाई अड्डे की परिकल्पना की गई है, जहां एकीकृत मल्टी मॉडल कार्गो केंद्र हो तथा जहां सारा ध्यान लॉजिस्टिक संबंधी खर्चों और समय में कमी लाने पर हो। समर्पित कार्गो टर्मिनल की क्षमता 20 लाख मीट्रिक टन होगी, जिसे बढ़ाकर 80 लाख मीट्रिक टन कर दिया जायेगा। औद्योगिक उत्पादों के निर्बाध आवागमन की सुविधा के जरिये, यह हवाई अड्डा क्षेत्र में भारी निवेश को आकर्षित करने, औद्योगिक विकास की गति बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभायेगा। इससे नये उद्यमों को अनगिनत अवसर मिलेंगे तथा रोजगार के मौके भी पैदा होंगे। हवाई अड्डे में ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर विकसित किया जायेगा, जिसमें मल्टी मॉडल ट्रांजिट केंद्र होगा। साथ ही, मेट्रो और हाई स्पीड रेलवे के स्टेशन होंगे, टैक्सी-बस सेवा और निजी वाहन पार्किंग की सुविधा भी होगी। इस तरह हवाई अड्डा सड़क, रेल और मेट्रो से सीधे जुड़ने में सक्षम हो जायेगा। नोएडा और दिल्ली को सुगम मेट्रो सेवा के जरिये जोड़ा जायेगा। आसपास के सभी प्रमुख मार्ग और राजमार्ग, जैसे यमुना एक्सप्रेस-वे, वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे, ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस-वे तथा अन्य भी हवाई अड्डे से जोड़े जायेंगे। हवाई अड्डे को प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल से भी जोड़ने की योजना है, जिसके कारण दिल्ली और हवाई अड्डे के बीच का सफर मात्र 21 मिनट का हो जायेगा। हवाई अड्डे में टर्मिनल के नजदीक ही हवाई जहाजों को खड़ा करने की सुविधा होगी ताकि उसी स्थान से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के परिचालन में वायु सेवाओं को आसानी हो। यह भारत का पहला ऐसा हवाई अड्डा होगा, जहां उत्सर्जन शुद्ध रूप से शून्य होगा। हवाई अड्डे के पहले चरण का विकास 10,050 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हो रहा है। यह 1300 हेक्टेयर से अधिक हेक्टेयर पर फैला है। पहले चरण का निर्माण हो जाने के बाद हवाई अड्डे की क्षमता वार्षिक रूप से 1.2 करोड़ यात्रियों की सेवा करने की हो जायेगी। निर्माण-कार्य तय समय पर है और 2024 तक पूरा हो जायेगा। इसे अंतरराष्ट्रीय बोली-कर्ता ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी क्रियान्वित करेगा।

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