अब डीएपी भी मिलेगी बोतल में, फसल के साथ भूमि की बढ़ाएगी उर्वरा शक्ति, इफको कर रहा है परीक्षण

 
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मीरजापुर, । किसानों को डीएपी की बोरी ले जाने के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। यूरिया के बाद अब किसानों को बोतल में ही डीएपी मिलेगी। नैनो डीएपी खाद खेती को समृद्ध करेगी साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ाएगी। इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) द्वारा जनपद के तहसील सदर, लालगंज व चुनार में पांच किसान के खेतों में इसका परीक्षण किया जा रहा है। 
जनपद के तहसील सदर में अश्वनी पांडेय, लालगंज के मटियारी खुर्द में बच्चन सिंह और चुनार में विनोद पटेल सहित पांच किसान अपने-अपने खेत में धान की फसल में नैनो डीएपी का प्रयोग कर रहे हैं। बोरी की खाद के मुकाबले बेहतर परिणाम आने पर अगली फसली वर्ष से जिले के उर्वरक की दुकानों पर मुहैया कराया जाएगा। इफको के वरिष्ठ प्रबंधक जीपी तिवारी ने बताया कि डीएपी की एक बोरी खाद के मुकाबले नैनो डीएपी काफी सुलभ व कारगर होगी। बोरी की खाद में से महज 30 फीसद डीएपी ही रसायन ही फसल को प्राप्त होता है, जबकि शेष 70 फीसद ठोस पदार्थ भूमि को पथरीली बनाता है। ऐसे में नैनो डीएपी इसके मुकाबले पूरा 100 फीसद घुलनशील होने के साथ ही पौधों को उच्च पोषण देने में भी सहायक है।

दो बार का प्रयोग लाभकारी
वरिष्ठ प्रबंधक  ने बताया कि नैनो डीएपी का फसल में दो बार प्रयोग कर सकते हैं। प्रति एकड़ परिक्षेत्र में 250 मिलीग्राम नैनो डीएपी का छिड़काव किया जाता है। प्रथम बार इसका प्रयोग बीज शोधन अर्थात धान की रोपाई के पूर्व घोल में धान की नर्सरी के जड़ को भिगोने के बाद उसकी रोपाई करें। इसके 25 से 30 दिन के बाद नैनो डीएपी के घोल का छिड़काव करें।

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