पंचायत चुनाव में फिर दिखी डकैतों के परिजनों की धमक, ठोकिया का भाई दीपक, राधे का पुत्र अरिमर्दन बना प्रधान

 
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चित्रकूट, । उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में आतंक का पर्याय रहे दुर्दांत डकैत पटेल उर्फ़ ठोकिया के भाई दीपक पटेल और दस्यु ददुआ के दाहिने हाथ रहे दुर्दांत डकैत राधे उर्फ़ सूबेदार सिंह के पुत्र अरिमर्दन सिंह ने पंचायत चुनाव में चित्रकूट जिले के सदर ब्लाक के शीतलपुर तरौहां और बंदरी गांव से जीत का परचम लहराया है।  

गौरतलब है कि विंध्य पर्वत श्रृंखला के मध्य बसा उत्तर प्रदेश का चित्रकूट जिला विगत चार दशको से ददुआ, ठोकिया, रागिया, बलखड़िया, बबली कोल आदि दुर्दांत डकैतों के आतंक का शिकार रहा है। बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े जिले में सुमार चित्रकूट में डकैतों के फरमान से ही ग्राम प्रधान से लेकर सांसद और विधायक बनते रहे हैं। 

 डकैत ददुआ का फरमान "वोट पड़ेगा हाथी, नहीं लाश मिलेगी घाटी में" आज भी लोगों के जेहन में है। डकैतों का आतंक इस कदर हावी था कि उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, बाँदा, फतेहपुर, कौशाम्बी, प्रयागराज तथा मध्य प्रदेश के सतना, रीवां, पन्ना, छतरपुर आदि जिलों में दुर्दान्तों के फरमान से सियासत की अंक गणित बनती और बिगड़ती रही है। 

 वर्ष 2007 के बाद डकैतों के आतंक का खात्मा शुरू हुआ। बसपा मुखिया मायावती की सरकार में जहां ददुआ और ठोकिया का सफाया हुआ। वहीं योगी सरकार में आतंक का फन उठाने की जुर्रत करने वाले बदमाशों का सफाया कर दिया गया। जिससे चुनावों में डकैतों की दखल और उनके परिजनों की भागेदारी पूरी तरह ख़त्म हो गई थी। 

 इधर डकैतों के परिजनों ने अपना रास्ता और तौर तरीका बदल कर जनसेवा में जुट गये। जिसके परिणाम स्वरुप सोमवार को घोषित हुए पंचायत चुनाव के परिणामों में दस्यु ठोकिया के भाई दीपक पटेल ने ग्राम बंदरी और दस्यु राधे उर्फ़ सूबेदार के पुत्र अरिमर्दन सिंह उर्फ़ सोनू ने शीतलपुर से ग्राम प्रधान पद पर रिकार्ड जीत हासिल की है।

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