पंचायत चुनाव में आरक्षण का मामला फिर हाइकोर्ट में

 

लखनऊ - उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव में आरक्षण मामला एक बार फिर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की चौखट पर पहुंच गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज (स्थानों और पदों के आरक्षण और आवंटन) (12वें संशोधन) नियम, 2021 को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई के बावत महाधिवक्ता को नोटिस जारी किया है।
अदालत में जब किसी कानून की वैधता को चुनौती दी जाती है तो उसमें पक्ष रखने के लिए महाधिवक्ता को नोटिस भेजकर सूचना दी जाती है। इस मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार व चुनाव आयोग को पक्ष पेश करने का निर्देश देकर अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद नियत की है।
न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने गुरुवार को यह आदेश दिलीप कुमार की याचिका पर दिया। इसमें उत्तर प्रदेश पंचायत राज (स्थानों और पदों के आरक्षण और आवंटन) (बारहवें संशोधन) नियम, 2021 समेत 17 मार्च को जारी इसकी अधिसूचना व राज्य सरकार के आदेश तथा 26 मार्च को जारी पंचायत चुनाव की अधिसूचना को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता के वकील अमित भदौरिया ने तर्क दिया कि अनुच्छेद 243 डी (4) विशेष रूप से चक्रानुक्रम (रोटेशन) के लिए प्रावधान करता है और इस प्रकार रोटेशन के प्रावधान का संवैधानिक आधार है। याची ने कहा कि एक बार शुरू होने वाली रोटेशन की प्रणाली को बीच में शून्य पर निर्धारित नहीं किया जा सकता है।
उन्होने कहा कि 12वें संशोधन से सरकार ने इस प्रक्रिया को रोक दिया जो कि संविधान के अनुच्छेद 243 डी (4) एवं 21 के विरुद्ध है। याची के अधिवक्ता ने ‘के कृष्ण मूर्ति बनाम भारत संघ’ के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का हवाला दिया, जिसमें यह कहा गया है कि “यह नीति एक सुरक्षा कवच है, जिससे एक विशेष पद को हमेशा के लिए आरक्षित किए जाने की संभावना से बचाता है”। उधर, सुनवाई के समय राज्य सरकार व चुनाव आयोग के वकील पेश हुए।

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