डॉ. धर्म सिंह सैनी के सपा में शामिल होने पर सहारनपुर की राजनीति में होगी उलटफेर !

दोनों प्रतिद्वंदी कैसे करेंगे एक साथ मच साझा, बना पाएंगे तालमेल, इसी पर रहेगी नज़र !
 
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सहारनपुर। प्रदेश के आयुष मंत्री डॉ.धर्म सिंह सैनी ने भी आखिरकार भाजपा को इस्तीफा देते हुए समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है, जिसके बाद अब जनपद की राजनीति में उलट फेर होना स्वाभाविक है। एक दूसरे के धुर विरोधी रहे इमरान मसूद व डॉ.धर्म सिंह सैनी अब एक मंच साझा करेंगे। यह भी अब चर्चा का विषय बना है।

जनपद में चल रही उलट फेर की राजनीति के चलते आज आखिरकार हां न के बीच प्रदेश के आयुष मंत्री डॉ.धर्म सिंह सैनी ने भी भाजपा छोड़ सपा का दामन थाम लिया है और इस फैसले के बाद अब जिले में भी राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे है। एक ओर जहां बेहट विधायक नरेश सैनी ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा है, तो वहीं पूर्व विधायक इमरान मसूद व विधायक मसूद अख्तर ने भी सपा का दामन थाम लिया है और दो दिन पूर्व भाजपा को न छोड़ने की घोषणा करने वाले आयुष मंत्री ने डॉ.धर्म सिंह सैनी ने एकाएक भाजपा को अलविदा कह दिया और सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव से भेंट कर सपा का दामन थाम लिया, जिसके बाद अब जिले की राजनीति में उलट फेर होना स्वाभाविक लग रहा है।

पूर्व विधायक इमरान मसूद व मंत्री डॉ.धर्म सिंह सैनी एक दूसरे के धुर विरोधी रहे है और दोनों एक दूसरे के सामने मजबूती से चुनाव भी लड़ चुके है। मंत्री डॉ.धर्म सिंह सैनी ने 2017 के विधान सभा चुनाव में इमरान मसूद को पराजित कर विधान सभा पहुंचने का काम किया था और वह मंत्री भी बने थे। लेकिन अब दोनों एक ही पार्टी में आ गये हैं और अब मंच साझा करने को लेकर दोनों में समन्वय स्थापित होता है या नहीं, यह आने वाला समय ही तय करेगा, लेकिन दोनों नेताओं को साइकिल सवारी कहां तक फायदा पहुंचाती है अब इस पर सभी की निगाहें लगी हुयी है। 

धर्म सिंह सैनी के इस्तीफा देने का सीधा असर उनके गृह जनपद सहारनपुर की सभी सात सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। डा सैनी के इस फैसले से सहारनपुर जिले की चुनावी राजनीति पर पड़ने वाले असर की अगर बात की जाये तो इसका सीध असर उनकी अपनी नकुड़ सीट पर भी पड़ता दिख रहा है। अब तक सपा नकुड़ सीट से पार्टी के दिवंगत प्रदेश अध्यक्ष रामशरण दास के बेटे जगपाल दास गुर्जर को चुनाव लड़ाना चाहती थी। डा. सैनी को सपा ने विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) बनाने की पेशकश की। सूत्रों के मुताबिक डा सैनी द्वार इस पेशकश पर राजी नहीं होने के बाद सपा प्रमुख अखिलेश ने उनके टिकट पर सहमति दे दी है। ऐसे में सपा नेतृत्व को इस सीट पर गुर्जर गुट को संतुष्ट करना पड़ेगा। साथ ही भाजपा, बसपा और कांग्रेस भी सपा की घेराबंदी कर मुकाबले को दिलचस्प बनाने की कोशिश करेंगे।

डा. सैनी मायावती की बसपा सरकार में 2007 में बेसिक शिक्षा मंत्री रहे हैं। लेकिन योगी सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री के बजाय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का ही दर्जा दिया गया था। पांच साल तक डा सैनी इस मलाल के साथ काम करते रहे।

भाजपा से उनकी नाराजगी की दूसरी वजह गृह जनपद में पांच साल तक स्थानीय प्रशासन में कोई सुनवाई नहीं होना भी रही। वह भाजपा से इस्तीफा देने वाले मंत्रियों और विधायकों के धड़े की अगुवाई कर रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा से भाजपा में शामिल हुए थे। उन्होंने पिछले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद को कांटे के मुकाबले में चार हजार वोटों से हराया था।

इस बार इमरान मसूद की भी सपा के टिकट पर जिले की बेहट सीट से चुनाव लड़ने की संभावना है। वहीं भाजपा खेमा पूर्व सांसद और पूर्व विधायक राघव लखनपाल शर्मा का नाम नकुड़ सीट से प्रस्तावित कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि पिछले 24 घंटे के भीतर डा. सैनी सहारनपुर जिले के ऐसे तीसरे विधायक हैं जिन्होंने दल-बदल किया है। बुधवार को जिले की बेहट सीट से कांग्रेस के विधायक नरेश सेनी ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। जबकि सहारनपुर देहात के विधायक मसूद अख्तर कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हो गये। इस दलबदल ने जिले की सियासत में उलटफेर कर दिया है।

स्पष्ट है कि सहारनपुर जिले के सात विधायकों में से तीन ने पार्टी बदल ली है। इमरान मसूद के भाई नोमान मसूद ने रालोद छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया। नोमान को बसपा ने गुरुवार को जिले की गंगोह सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया है ।

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