ब्लैक फंगस के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण नमी : डॉ आकाश

 
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वाराणसी। कोरोना की दूसरी लहर में लाखों लोग महामारी की विभिषिका का शिकार बन गये। करोड़ों संक्रमित लोग स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे हैं। अब पोस्ट कोविड, ब्लैक फंगस के चलते हजारों लोगों को अपनी आंखे गवानी पड़ी। ऐसे में सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी पड़ेगी। गर्भवती महिलाओं सहित देश की बड़ी आबादी का वैक्सिनेशन प्राथमिकता के आधार पर कराया जाना चाहिये। 

गुरूवार को ये बातें पंडित कमलापति त्रिपाठी फाउन्डेशन के तत्वावधान में आयोजित वर्चुअल परिचर्चा में डाक्टरों के पैनल ने कहीं। नेत्र सर्जन डॉ. अनुराग टंडन ने कहा कि ब्लैक फंगस की बीमारी से लोगों को भयाक्रांत होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि यह बीमारी उन्ही को होती है, जिनका इम्यूनिटी सिस्टम बहुत ज्यादा कमजोर होता है अथवा जो हाई डायबटिक होते हैं या गलत दवावों के शिकार होते हैं। डॉ.अनुराग ने कहा कि ऐसा नहीं है कि जिसको भी कोरोना हुआ वो सभी ब्लैक फंगस की बीमारी के मरीज होंगे। 

परिचर्चा में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ आकाश टंडन ने बताया कि ब्लैक फंगस की बढ़ोत्तरी का सबसे बड़ा कारण नमी है। उन्होंने बताया कि जैसे घर में डबल रोटी को फ्रिज में रख दे तो नमी के कारण उस पर फंफूद जम जाती है। नाक से होने वाले प्रदूषण से भी फंगस फैलता है। इसका एक और  बड़ा कारण है कि लोग बिना डॉक्टरी परामर्श के दवा लेने लगते हैं। जो घर पर ऑक्सीजन सिलेंडर से ऑक्सीजन लेते हैं, उस सिलेंडर के अंदर भी कभी-कभी कुछ ऐसे कंडमनेशन होते हैं, जिसकी वजह से शरीर के अंदर ब्लैक फंगस जाने के रास्ते खुले रहते हैं। परिचर्चा में प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अमृता ने बताया कि कोरोना से गर्भवती महिलाओं में भय का माहौल पैदा हो गया है, जबकि इससे कतई भयक्रांत होने की जरूरत नहीं है। 

परिचर्चा में प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी टन्डन, वरिष्ठ पत्रकार केडीएन राय ने भी विचार रखा। संचालन विजय कृष्ण अन्नू और तकनीकी संचालन पुनीत मिश्रा ने किया। परिचर्चा में कांग्रेस नेता विजय शंकर पाण्डेय, बैजनाथ सिंह, प्रो. अनिल कुमार उपाध्याय, शैलेन्द्र  सिंह, भूपेन्द्र प्रताप सिंह और आनन्द मिश्रा ने भी भाग लिया।

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