यूपी के गन्ना किसानो से केन्द्र सरकार कर रही है सौतेला व्यवहार,एथेनॉल खरीद से यूपी को बाहर निकाला 

 
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लखनऊ - उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानो के प्रति सौतेले बर्ताव का आरोप लगाते  हुए राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय सचिव अनिल दुबे ने कहा कि केन्द्र सरकार के उपक्रम भारत पेट्रोलियम ने 477.50 करोड़ लीटर एथनॉल खरीद के लिए निकाले गए टेंडर में प्रदेश को जगह नहीं दी है जिसका प्रतिकूल प्रभाव चीनी उद्योग पर पड़ना तय है।

श्री दुबे ने रविवार को कहा कि भारत पेट्रोलियम ने 27 अगस्त को एक टेंडर जारी किया हैं जिसमें विभिन्न राज्यों से एथनॉल की खरीद के लिए निविदाएं मांगी गई हैं। इसमें यूपी को छोड़कर सभी राज्यों को शामिल किया गया है। सरकार की नीति के मुताबिक ऑयल कंपनियां उन राज्यों से एथनॉल लेने की तैयारी कर रही  हैं जहां अनाज से इसका उत्पादन किया जाता है। यूपी में इसका उत्पादन गन्ने से होने के कारण इसे टेंडर में शामिल नहीं किया गया है, जो कि एक चौकाने वाला निर्णय है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की लगभग 50 इकाइयां प्रति वर्ष शीरे से 50 से 60 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन करती हैं, और जिसके विक्रय से गन्ना किसानों के भुगतान में आसानी होती है ऐसे में यदि एथनॉल की बिक्री प्रभावित हुई तो इसका सीधा असर पहले से कोरोना और महंगाई की मार झेल रहे किसानों पर पड़ेगा।

रालोद नेता ने कहा कि प्रदेश मे 15 से अधिक नए प्रोजेक्टों पर काम हो रहा है, अब यह इन्वेस्टमेंट फंस जाएगा। बैंक भी फंडिंग रोक देंगे। यह यूपी के लिए बड़ा झटका है। प्रदेश का किसान पहले से महंगाई, बाढ़ के कहर, कोरोना और अन्य महामारियों से त्रस्त है, ऐसे मे गन्ना किसानो को उनकी लागत के अनुसार एवं समय पर भुगतान न हो पाना काफी निराशाजनक और चिंताजनक है। उन्होंने टेंडर में यूपी को भी तत्काल शामिल करने की मांग की है।

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