रायबरेली में फूलन देवी की मूर्ति के लिए बना चबूतरा तोड़ा, करणी सेना ने बताया राजपूतों की विजय

 
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रायबरेली। पूर्व सांसद स्व.फूलन देवी की प्रतिमा को लेकर राजनीति एक नए मोड़ पर आ गई है, मंगलवार की शाम मूर्ति के लिए बनाए जा रहे चबूतरे को कुछ लोगों ने तोड़ दिया।

प्रशासन का कहना है कि मूर्ति की स्थापना के लिए कोई अनुमति नहीं थी। हालांकि इसको लेकर राजनीति भी तेज हो गई और करणी सेना ने इसे राजपूतों की विजय बताया है। मूर्ति स्थापित करने के मामले में नया मोड़ आ गया है।

रायबरेली के ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र के खंधारीपुर मजरे जब्बारीपुर गांव में  पूर्व सांसद स्व.फूलन देवी की मूर्ति स्थापित करने की तैयारी चल रही थी। यह मूर्ति 20 सितम्बर को लगाने की योजना थी। गांव में निषाद बिरादरी की बहुलता है। फूलन देवी भी निषाद जाति की थीं और निषाद बिरादरी के लोग उन्हें अपना नेता मानते हैं। यही वजह है कि अंदरखाने में गांव में फूलन देवी की प्रतिमा लगाने के लिए गांव में मूर्ति लगाने के लिए चबूतरा तैयार कर लिया था। आगामी 20 सितम्बर को मूर्ति लगाने की योजना थी जिसके लिए गांव के लोग दिन-रात लगे हुए थे।

कोतवाल ने गांव के प्रधान अनिल कुमार को फोनकर मूर्ति लगाने के लिए परमीशन लेने की बात कही थी। इस बाबत प्रधान ने बताया कि गांव के लोग फूलन देवी की मूर्ति लगाने की तैयारी में हैं इससे मेरा कोई लेना देना नही है।

उधर कोतवाल विनोद कुमार सिंह ने बताया कि गांव में फूलन देवी की मूर्ति लगाने की योजना के बारे में जानकारी हुई है। प्रधान को बिना परमीशन मूर्ति न लगाने को कहा गया है। जबकि करणी सेना के नेताओं ने कहा कि समाजवादी पार्टी के विधायक ऊंचाहार मनोज पाण्डेय और उनके प्रदेश सगंठन द्वारा जो 20 सितंबर को कुख्यात दस्यु सुंदरी, डकैत फूलन देवी की मूर्ति लगवाने जा रहे हैं।यह राजनीति से प्रेरित है,नेताओं ने इसे राजपूतों की विजय भी बताया।

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