UP: स्वामी प्रसाद मौर्य का योगी कैबिनेट से इस्तीफा, बीजेपी को झटका और सपा के लिए अच्छा क्यों?

 
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उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए टिकट दिए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली में बैठक चल रही है. इधर योगी कैबिनेट के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने मंगलवार दोपहर राज्पाल को अपना इस्तीफा सौंपा.

कुछ ही देर बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी का दामन भी थाम लिया. समाजवादी पार्टी ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस बात की पुष्टि की है.

माना जा रहा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य के जाने से भारतीय जनता पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले को भारी क्षति पहुंचेगी. वहीं अखिलेश यादव जो इस बार यादवों के अलावा अन्य पिछड़ी जातियों का वोट पाना चाहते हैं, उनके लिए यह सुनहरा मौका हो सकता है.

हालांकि स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य अभी भी बीजेपी से सांसद हैं.


राज्यपाल आनंदीबेन को भेजे अपने इस्तीफे में मौर्य ने लिखा है, दलितों, पिछड़ों, किसानों बेरोजगार नौजवानों एवं छोटे- लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के कारण उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल से मैं इस्तीफा देता

हूं.

जानकारी के मुताबिक इनके साथ और भी कई विधायक हैं, जिन्हें 2017 में मौर्य ने टिकट दिलाई थी. इसलिए माना जा रहा है कि वह भी जल्द ही पार्टी छोड़ सकते हैं. फिलहाल मंत्री धर्म सिंह सैनी और दारा सिंह चौहान के भी इस्तीफे की अटकलें धर्म सिंह और दारा सिंह दोनों उनके खेमे के माने जाते हैं. तीनों योगी सरकार में मंत्री हैं.

बता दें, स्वामी प्रसाद मौर्य, धर्म सिंह सैनी और दारा सिंह चौहान तीनों बीएसपी के बड़े नेता रहे हैं और बसपा सरकार में भी मंत्री रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य पिछले काफी दिनों से पार्टी में अपनी बात रख रहे हैं. लेकिन अपनी उपेक्षा और हैसियत के मुताबिक तवज्जो नहीं देने से मौर्य नाराज हुए हैं.

सवाल उठ रहा है कि अगर समाजवादी पार्टी से जुड़े तो उन्हें क्या फायदा होगा. स्वामी प्रसाद मौर्य का पूर्वी यूपी में काफी दबदबा माना जाता है. ख़ासकर गाजीपुर वाले इलाके में पिछले चुनाव में भी इनकी वजह से ही पिछड़ी जातियों का समर्थन बीजेपी को मिला.

वहीं अखिलेश यादव इस बार बीजेपी के नक्शे कदम पर चलते हुए, हर हाल में पिछड़ी जातियों को अपने तरफ मोड़ने में लगे हैं. इससे पहले ओम प्रकाश राजभर को भी अपने साथ लिया. स्वामी प्रसाद मौर्य भी इस अभियान का हिस्सा माने जा रहे हैं.

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