योगी ने बदला सूरदास के गाँव का नाम, 72 साल इसी गांव में रहे थे सूरदास 

 

मथुरा-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विशेष दिलचस्पी से उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील के एक गांव को उसका पुराना नाम फिर से मिला है।
जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल ने गुरूवार को बताया कि गोवर्धन तहसील के महमदपुर गांव का नाम अब बदलकर पारासौली हो गया है तथा इसका गजट नोटीफिकेशन भी हो गया है। इस गांव में हिंदी के महान कवि सूरदास ने 72 साल तक साधना की थी।
सूरदास ब्रज रास स्थली विकास समिति पारासौली मथुरा के सचिव हरिबाबू कौशिक ने बताया कि ऋषि पारासर की जन्मस्थली होने के कारण गोवर्धन तहसील के इस गांव का मूल नाम पारासौली था मगर मुगल शासकों ने इसका नाम बदलकर महमदपुर कर दिया था। इस गांव में हिन्दी भाषा के महान कवि सूरदास ने अपने जीवन के अंतिम 72 वर्ष बिताए थे। उन्होंने ही इस गांव में अंतिम सांस ली थी।
उन्होंने बताया कि 1982 से इस गांव का मूल नाम वापस लाने के लिए उन्होंने प्रयास किया तथा तब से लेकर अब तक के मुख्यमंत्रियों से मिलकर उन्हें ज्ञापन दिए। सभी ने उन्हें कोरा आश्वासन ही दिया मगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2018 में इसे गंभीरता से लिया और नाम बदलने के आदेश दिए। इस प्रक्रिया को गति तब मिली जब उनके अनुरोध पर उप्र व्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्रा ने इस आदेश को हकीकत में बदलने का पूरा प्रयास किया और कवियों के इस तीर्थ का नाम एक बार फिर बदलकर पारासौली हो गया।
महाकवि सूरदास के आध्यात्मिक गुरू महाप्रभु वल्लभाचार्य के अनुसार पारासौली वह पावन स्थल है जहां पर श्यामा श्याम ने लगातार 6 माह तक रास किया था। महाकवि सूरदास ने इस गांव में न केवल अधिकांश रचनाएं सम्पादित की बल्कि उन्होंने महान ग्रन्थ सूरसागर की रचना भी इसी गांव में की थी।

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