Monday, April 7, 2025

मेरठ में घोटाले की पोल खोलने पर चली गोली-बैंक मैनेजर ने रचाया साजिश का जाल,दो गिरफ्तार

मेरठ। बैंक अनियमितताओं में फंसे बैंक मैनेजर ने लोन डिफाल्टर और उसके दो साथियों की मदद से बैंक जांच अधिकारी पर दो बार हमला करवाया लेकिन, हर बार जांच अधिकारी गोली लगने से बाल-बाल बच गया। पुलिस ने आरोपी मैनेजर और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। ‌ गिरफ्तार अभियुक्तों के कब्जे से तमंचा कारतूस और घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद की गई है।

 

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नगर पुलिस अधीक्षक आयुष विक्रम सिंह ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इंडियन ओवरसीज बैंक सहारनपुर में स्थित मंगल पांडे नगर ब्रांच और घंटाघर ब्रांच के द्वारा जो बैंक लोन निर्गत किए गए थे। उनमें अनियमितताएं पाए जाने के कारण वादी जितेंद्र कुमार और अरविंद चौधरी को चेन्नई स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक के ऑफिस द्वारा ऑडिट कर अनियमितताओं की जांच कराए जाने हेतु नियुक्त किया गया था।

 

 

इस जांच के क्रम में वादी जितेंद्र के द्वारा स्वीकृत किए गए बैंक लोन की जांच कर रिपोर्ट इंडियन ओवरसीज बैंक के रीजनल ऑफिस मेरठ और चेन्नई में मुख्यालय को दे दी। मनोज ब्रांच मैनेजर के द्वारा अलग-अलग तरीकों से जांच को प्रभावित करने का काम किया जाता रहा। परंतु बात न बन पाने के कारण रिपोर्ट फाइनल हो गई और इस मामले में बैंक की ओर से पुलिस में रिपोर्ट कराए जाने हेतु निर्देशित किया जाता इससे पहले मनोज के द्वारा घंटाघर स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक से ऋण प्राप्तकर्ता बाबर पुत्र इमरान जिसका लोन डिफॉल्टर हो चुका था से संपर्क किया गया और और मनोज ने उससे कहा कि मैं तुम्हारा बैंक लोन सेटल कर दूंगा इसके बदले में तुम्हे मेरा एक काम करना पड़ेगा तुम्हें जितेंद्र जो मेरे घोटाले की जांच कर रहा है उसको सबक सिखाना होगा इस काम के लिए बाबर तैयार हो गया तब मनोज के द्वारा बाबर को 65,000/- रूपये हथियार खरीदने के लिए दिए गए।

 

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बाबर ने इस काम के लिए अपने मिलने वाले दो लड़के निखिल शर्मा और कार्तिक शर्मा उर्फ गोलू को तैयार कर लिया और उन्हें हथियार व कुछ पैसे भी दिए। 24 फरवरी को जब वादी जितेंद्र चौधरी चरणसिंह विश्वविधालय परिसर स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक में गया था तब बाबर ने जितेंद्र की गाड़ी का नंबर बताते हुए कार्तिक व निखिल को भेजा। कार्तिक और निखिल ने कार का पीछा किया और बिजली बंबा रोड पर रेलवे क्रॉसिंग पार करने के बाद जितेंद्र की कार पर फायरिंग करके वहां से भाग कर सहारनपुर चले गए।

 

 

 

जिसके सम्बन्ध में वादी की तहरीर के आधार पर थाना परतापुर पर धारा 109/61(2) बी.एन.एस. व धारा 3/25/27 आयुध अधिनियम पंजीकृत किया गया। अगले दिन जब मनोज और बाबर को पता चला की गोली जितेंद्र को नहीं लगी है तब उन्होंने दोबारा हमला करने की योजना बनाई इस योजना में 01 मार्च को जब वादी जितेंद्र घंटाघर स्थित इंडियन ओवरसीज की ब्रांच सहारनपुर में पहुंचा।

 

 

तब मनोज ने बाबर को और बाबर ने दोनों शूटर को बताया की जितेंद्र सहारनपुर आया हुआ है। इस पर कार्तिक और गोलू वापसी के समय जितेंद्र पर पिस्टल से जान से मारने की नियत से फायरिंग की। गोली गाड़ी का शीशा तोड़ते हुए ड्राइवर साइड के दरवाजे में जाकर लग गई और जितेंद्र बाल बाल बच गया इस सम्बन्ध में थाना रामपुर मनिहारन पर धारा 109/324(4) बी.एन.एस. पंजीकृत किया गया।

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