दुर्ग। जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत वादियों में घूमने गए भिलाई और रायपुर के पर्यटक वापस लौट आए हैं। छत्तीसगढ़ के भिलाई से 10 और रायपुर से 55 लोगों का यह समूह घूमने के लिए कश्मीर गया था, लेकिन उनकी यह यात्रा एक डरावने अनुभव में बदल गई। पर्यटकों ने बताया कि वे पहलगाम में थे, तभी अचानक गोलीबारी शुरू हो गई। चारों ओर अफरा-तफरी मच गई और एम्बुलेंस की आवाजें गूंजने लगीं। अचानक से खुशनुमा माहौल भयावह मंजर में बदल गया। भिलाई पहुंचे पर्यटकों ने आतंकवादी घटना की आपबीती बताई।
रेलवे स्टेशन पर आईएएनएस से बात करते हुए एक महिला ने पहलगाम हमले की घटना को बताया। महिला ने कहा कि वहां स्थिति भयावह थी, डर और दहशत से भरी हुई थी। हम सभी बुरी तरह घबरा गए थे। हम जो डर महसूस कर रहे थे, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है, खास तौर पर तीन साल के बच्चे और सत्तर साल के बुजुर्गों के साथ। हम सोचते रहे कि कैसे सुरक्षित जगह ढूंढी जाए। होटल में भी हम उतने ही डरे हुए थे, मानो हर जगह खतरा ही खतरा हो। सेना ने हमें जल्द से जल्द वहां से निकलकर सुरक्षित जगह पर पहुंचने के लिए कहा था। लेकिन कश्मीर बंद होने के कारण हम श्रीनगर में फंसे रहे। हम वहां की सबसे संवेदनशील जगह लाल चौक पर रुके हुए थे, इसलिए हमारा डर बहुत ज्यादा था। लोगों को कश्मीर जाने की सलाह के सवाल पर महिला ने कहा कि कश्मीर जन्नत है। कश्मीर हमारा है और वहां जाना चाहिए। वर्तमान में स्थिति खराब है, इसलिए अभी वहां जाना नहीं चाहिए।
कश्मीर से लौटी दूसरी महिला पर्यटक ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमने कई संघर्षों और रोमांचकारी क्षणों का सामना किया है। लेकिन सभी को सुरक्षित वापस लाना हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। यह सिर्फ हम ही नहीं थे, हमारे 65 लोगों के समूह ने एक परिवार की तरह एक-दूसरे का साथ दिया। हमें अधिकारियों से भी मदद मिली और हमने दो दिन तक इंतजार किया। जैसे ही रास्ता खुला हम वहां से निकल पड़े। हम बहुत डरे हुए थे। बता दें कि आतंकवादियों द्वारा पहलगाम के बैसरन मैदान में 26 नागरिकों की नृशंस हत्या के बाद पूरे देश के लोग आक्रोशित हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस आतंकी घटना के विरोध और आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किए जा रहे हैं।