हिंदी सिने जगत की लीजेंड एक्ट्रेस अरुणा ईरानी पिछले महीने बैंकॉक में चलते वक्त गिर गई थीं। इस वजह से उन्हें बहुत चोट आई और पैर भी फ्रैक्चर हो गया था। मुंबई लौटने के बाद उनका लंबा इलाज चला। अब उनके पैर से प्लास्टर उतर चुका है और चलने-फिरने लगी हैं लेकिन फिलहाल वह घर पर आराम कर रही हैं।
18 अगस्त, 1946 को पैदा हुई अरुणा ईरानी के पिता एक थिएटर एक्टर और मां फिल्म एक्ट्रेस थीं। अपने माता पिता की तरह अरुणा ईरानी ने महज 15 साल की उम्र में साल 1961 की फिल्म ‘गंगा जमुना’ से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट करियर की शुरुआत की थी।
इसके बाद अरूणा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अगले ही साल वे फिल्म ‘अनपढ़’ (1962) में नजर आईं। इसके अलावा उन्हें ‘फर्ज’, ‘बॉबी’, ‘फकीरा’, ‘सरगम’, ‘रेड रोज’, ‘लव स्टोरी’ और ‘रॉकी’ जैसी न जाने कितनी ही फिल्मों में देखा गया।
अरुणा ईरानी ने जितेंद्र, धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन जैसे अपने दौर के हर बड़े स्टार के साथ काम करते हुए अपनी अदाकारी से हर किसी को मुरीद बनाया लेकिन फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ को छोड़कर ज्यादातर फिल्मों में वह सिर्फ सपोर्टिंग रोल में ही नजर आती रहीं।
इस तरह धीरे-धीरे वह साइड एक्ट्रेस बन गईं और उनके हिस्से में सिर्फ छोटे-मोटे रोल ही आते रहे। अरुणा ईरानी पिछले 64 सालों से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक्टिव है। इस दरमियान अरुणा ईरानी ने हिंदी, मराठी और गुजराती सिनेमा में लगभग 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है।
‘औलाद’ (1968), ‘हमजोली’ (1970), ‘देवी’ (1970) और ‘नया ज़माना’ (1971) जैसी फिल्मों में कॉमेडी एक्टर महमूद के साथ अरूणा ईरानी की जोड़ी को काफी पसंद किया गया। इस दौरान महमूद के साथ उनका नाम भी जोड़ा गया।
अरूणा ईरानी ने 1990 में मशहूर डायरेक्टर कुकू कोहली से शादी रचाई । शादी के बाद भी अरूणा ईरानी ने फिल्म और टीवी के लिए काम करना जारी रखा।
अपने बाद के करियर में अरुणा ईरानी ने टेलीविज़न इंडस्ट्री में कदम रखते हुए ‘मेहंदी तेरे नाम की’, ‘देस में निकला होगा चाँद’, ‘रब्बा इश्क ना होवे’ ‘तुम बिन जाऊं कहां’, ‘जमीन से आसमान तक’ ‘कहानी घर घर की’ ‘मायका’ और ‘वैदेही’ जैसे अनेक टीवी शोज में चरित्र भूमिकाएँ निभाईं। उन्होंने कुछ टीवी सीरियल का निर्देशन और निर्माण भी किया।
‘पेट प्यार और पाप’ (1985) और ‘बेटा’ (1993) में अरूणा ईरानी की भूमिकाओं के लिए उन्हें दो बार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्म फेयर अवार्ड मिले। साल 2012 में 57 वें फिल्मफेयर पुरस्कार समारोह में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
-सुभाष शिरढोनकर