Monday, April 7, 2025

तापमान बढऩे और बारिश की कमी से पक्षियों के जीवन चक्र पर संकट

पिछले चार- पांच वर्षों से मार्च से जून तक मौसम के गर्म रहने व मानसून पूर्व बारिश की गतिविधियों में कमी से देश के पक्षियों के जीवन चक्र पर संकट बढ़ता जा रहा है। अत्यधिक तापमान का पक्षियों के प्रजनन से लेकर स्वास्थ्य तक पर असर पड़ रहा है। विपरीत मौसम में पक्षियों के पलायन व इनकी संख्या में कमी से जैव विविधता के असंतुलित होने व इको सिस्टम ( परिस्थितिकी तंत्र  ) के विगडऩे की आशंका वन्य जीवन के विशेषज्ञों ने जाहिर की है। इस वर्ष भी मार्च से ही तापमान औसत से दो से पांच डिग्री सेल्सियस ऊपर रह रहा है। लगातार तीसरे वर्ष भी 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान वाले दिनों की संख्या कुछ जगहों को छोड़कर शेष हिस्सों में बढ़ी है।

पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार लगातार भीषण गर्मी की वजह से पक्षियों को लू और डिहाइड्रेशन होने के साथ उनकी प्रजनन की क्षमता कम या खत्म हो जाती है। घोसलों में चूजे भी मरने लगते हैं।  15 से 20 दिनों तक तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने पर कई पक्षियों के लिए इसे सहन कर पाना मुश्किल होता है। पिछले वर्ष हुई गणना में  राज्य में 365 प्रकार के पक्षी पाए गए थे। पहले इसकी संख्या 400 के ऊपर थी। पक्षियों की गणना जेएसआई, डब्लू डब्लू एफ न्यूज, मंदार नेचर क्लब, प्रोफेशनल पक्षी विशेषज्ञ व प्रोफेसर- छात्रों की कई टीमों ने मिलकर की थी।

आहार के लिए ज्यादा नहीं उड़ पाते हैं पक्षी
तल्ख धूप की वजह से पक्षियों के आहार पर भी संकट हो जाता है। जमीन पर पाए जाने वाले कीड़े, मकोड़े, टिड्डे के साथ पानी सूख जाने या उसके गर्म होने से जलीय जीव घोंघा, मेढ़क,केकड़े आदि मरने लगते है। लू व गर्मी से ऊर्जा  खत्म हो जाने से भोजन के लिए पक्षी ज्यादा दूर तक उड़ नहीं पाते है। सामान्यत: बस्तियों, बगीचे व पेड़ पौंधे पर घोंसला बनाकर रहने वाले पक्षी 10 किलोमीटर तक आहार की तलाश में उड़कर जाते है लेकिन इन दिनों दो- तीन किलोमीटर भी जाना इनके लिए मुश्किल होता है। नतीजन पक्षियों को कुपोषण से कमजोरी हो जाती है।

पक्षियों की बदली दिनचर्या
घरों में घोंसला बनाकर रहने वाले पक्षियों की चेतना अलग प्रकार की होती हैं। इन्हें मौसम का पूर्वाभास हो जाता है। मौसम के अनुसार इनकी आवाजाही होती है। लगातार तल्ख धूप की वजह से इन दिनों पक्षियों की दिनचर्या बदल गई है। सूर्यास्त होने के समय अपने घोंसले में लौट जाते हैं, लेकिन तड़के तीन- चार बजे ही घोंसले से दाना पानी के लिए निकलने लगते है। खासकर घरों व छतों के मुंडेरों पर घोंसला बनाने वाली चिडिय़ा धूप के तेज होते ही घोंसले में आराम करने पहुंच जाती है। फिर शाम को चार बजे से निकलती है ।

देश में पाए जाने वाले कुछ प्रमुख पक्षी-
कामन मैना, गौरैया, सोनकंठी, कोयल, तोता, कबूतर, मोर, गिद्ध, बतख, बुलबुल, कौवा, उल्लू , लौह सारंग, जांघिल, पलाई कैच, टेरेक, सैंड पाइपर, स्पेन चिरैया, तितर, बगुला, नीलकंठ, बाज, बगेरी, ईगल , हंस शामिल है।

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