Thursday, May 30, 2024

नोएडा में अरबों के जीएसटी घोटाले के मास्टर माइंड मां-बाप व बेटा गिरफ्तार

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नोएडा।  थाना सेक्टर 20 पुलिस एवं सीआरटी के संयुक्त प्रयास से नोएडा फर्जी जीएसटी फर्म्स का दुर्विनियोग कर अरबों रूपयों की आईटीसी का फ्रॉड करने वाले 25-25 हजार रूपयों के 3 ईनामिया शातिर अपराधी/उद्योगपति को गिरफ्तार किया गया है। इनके कब्जे से 6  लग्जरी कारें, 7 मोबाइल फोन, 1 टैबलेट व 1 लाख 41 हजार रुपया नकद बरामद हुआ है। 16 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की जीएसटी घोटाले में गिरफ्तार तीनों एक ही परिवार के मां-बाप व बेटा है। तीनों अरबपति ईस्ट पंजाबी बाग थाना पंजाबी बाग पश्चिमी दिल्ली के रहने वाले हैं।

 

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अपर पुलिस उपायुक्त शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि थाना सेक्टर-20 पुलिस ने वर्ष 2023 में 3 हजार से ज्यादा फर्जी कंपनियां खोलकर 16 हजार करोड़ से ज्यादा के जीएसटी घोटाला करने के मामले  का खुलासा किया था। उन्होंने बताया कि अब तक इस मामले में 32 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस गैंग का सरगना संजय धींगरा, उसका बेटा मयंक ढींगरा तथा मां कनिका फरार चल रहे थे। उन्होंने बताया कि इनकी गिरफ्तारी पर 25-25 हजार रुपए के इनाम घोषित था। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए 9 माह से प्रयास कर रही थी। आरोपी विभिन्न जगहों पर छुपकर रह रहे थे। ये लोग फर्जी दस्तावेज के आधार पर होटल में कमरा बुक करवाते थे, तथा फर्जी दस्तावेज के आधार पर मोबाइल फोन आदि का सीम कार्ड हासिल करके अपने गोरख धंधे को चला रहे थे। उन्होंने बताया कि इनके पास से पुलिस ने 6 लग्जरी कारे, 1,41,000 नगद, 7 मोबाइल फोन, टैब आदि बरामद किया है।

 

 

उन्होंने बताया कि 1 जून वर्ष 2023 को थाना सेक्टर-20 पुलिस ने इस गैंग का खुलासा करते हुए  दीपक मरजानी, उसकी पत्नी विनीता, आकाश सैनी, विशाल, मोहम्मद यासीन, राजीव, अतुल सेगर और अश्वनी को गिरफ्तार किया था। उसके बाद पुलिस में विभिन्न बार मे कार्रवाई करते हुए इस गैंग के अबतक  41 लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि ये लोग देश के विभिन्न जगहों पर रहने वाले लाखों लोगों के पैन कार्ड और आधार कार्ड का डाटा अवैध रूप से हासिल करके उसके आधार पर फर्जी कंपनी खोलते थे। इसके बाद जीएसटी नंबर लेकर फर्जी बिल बनाकर जीएसटी रिफंड प्राप्त कर सरकार को करोड़ों का चूना लगाते थे। जांच मे यह पता चला है कि जालसाज फर्जी कंपनियों को जीएसटी नंबर के साथ ऑनडिमांड बेच देते थे। इन कंपनियों के नाम पर पैसे जमा कर काले धन को सफेद किया जा रहा था।

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