Sunday, May 26, 2024

उत्तर प्रदेश में सुबह नौ बजे तक 12.94 फीसदी मतदान

मुज़फ्फर नगर लोकसभा सीट से आप किसे सांसद चुनना चाहते हैं |

लखनऊ। लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में उत्तर प्रदेश के 12 जिलों की 10 संसदीय सीटों के लिए मंगलवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान जारी है और सुबह नौ बजे तक औसतम 12.94 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया था।

राज्य निर्वाचन आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार सुबह नौ बजे तक आगरा में 12.74 प्रतिशत, आवंला में 11.42 प्रतिशत, बदायूं में 12.89 प्रतिशत, बरेली में 11.59 प्रतिशत, एटा में 13.16 प्रतिशत, फतेहपुर सीकरी में 14 प्रतिशत, हाथरस में 13.43 प्रतिशत, फिरोजाबाद में 13.36 प्रतिशत,मैनपुरी में 12.18 प्रतिशत और संभल में 14.71 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया था।

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मतदान शुरु होते ही कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गयीं जिनमें कामकाजी घरेलू महिलाओं और मार्निंग वॉकर्स की तादाद सबसे ज्याद थी। बुजुर्ग मतदाताओं की सुविधा के लिये मतदान केंद्राे पर व्हील चेयर्स की सुविधा मौजूद रही वहीं पहली बार वोट डालने जा रहे युवा मतदाताओं ने मतदान के बाद मतदान केंद्रो पर बने सेल्फी प्वाइंट पर फोटों खींचकर लोकतंत्र के महापर्व को यादगार बनाया।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिनवा ने कहा कि इस चरण में जिन 10 सीटों पर मतदान हो रहा है, उनमें संभल, हाथरस, आगरा, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदांयू, आंवला और बरेली हैं। उन्होंने कहा, “तीसरे चरण की 10 लोकसभा सीटों में से आठ सीटें सामान्य श्रेणी की हैं और दो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं।”
उन्होंने कहा कि 20,415 मतदान केंद्रों पर मतदान शाम छह बजे तक जारी रहेगा। उन्होने कहा मुरादाबाद, संभल, हाथरस, अलीगढ़, आगरा, एटा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, कासगंज, बदांयू और बरेली सहित 12 जिलों में मतदान हो रहा है। इस चरण में 1.01 करोड़ से अधिक पुरुष और 87.69 लाख महिलाओं सहित 1.89 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर आठ महिलाओं सहित 100 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला तय करेंगे।

उन्होंने कहा कि आगरा में सबसे अधिक 20,72,685 मतदाता हैं, जबकि एटा में सबसे कम 17,524 पंजीकृत मतदाता हैं। उन्होंने कहा, बरेली 13 उम्मीदवारों के साथ सूची में शीर्ष पर है, जबकि फिरोजाबाद में सबसे कम सात उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे हैं।

रिनवा ने बताया कि सभी मतदान केन्द्रों पर आयोग के अधिकारी पैनी नजर रखे हुए है। इसके लिए तीन विशेष पर्यवेक्षक, 10 सामान्य पर्यवेक्षक, छह पुलिस पर्यवेक्षक और 14 व्यय पर्यवेक्षक तैनात किये गये हैं। उन्होंने कहा, इसके अलावा 1,887 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 241 जोनल मजिस्ट्रेट, 668 स्टेटिक मजिस्ट्रेट और 2,859 माइक्रो पर्यवेक्षक भी तैनात किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव कराने के लिए पर्याप्त संख्या में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गयी है। स्ट्रॉंग रूम की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी अर्धसैनिक बलों को सौंपी गई है। अर्धसैनिक और पुलिस बलों के अलावा आपातकालीन स्थिति में चिकित्सा सहायता के लिए एयर एम्बुलेंस और हेलीकॉप्टर की भी व्यवस्था की गई है।

लोकसभा चुनाव के इस चरण में सबसे दिलचस्प मुकाबला मैनपुरी सीट पर देखने को मिल रहा है जहां मौजूदा सांसद और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह चुनौती दे रहे हैं। सपा का गढ़ माने जाने वाले मैनपुरी में पार्टी 1996 के बाद से कभी चुनाव नहीं हारी है। पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा में पांच बार इसका प्रतिनिधित्व किया है। 2022 में मुलायम के निधन के बाद हुए उपचुनाव में डिंपल यादव ने सीट जीत ली।

संभल में सपा ने मौजूदा विधायक जिया-उर-रहमान बर्क को मैदान में उतारा है, जो पूर्व सांसद शफीकुर रहमान बर्क के पोते हैं। शुरुआत में पार्टी ने शफीक-उर-रहमान को टिकट दिया, लेकिन लंबी बीमारी के बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। भाजपा ने इस सीट पर दोबारा कब्जा करने के लिए परमेश्वर लाल सैनी को मैदान में उतारा है, जिन्होंने 2019 में बर्क के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

आगरा सीट पर भाजपा ने मौजूदा सांसद और केंद्रीय मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल को दोहराया है, जिन्हें सपा के सुरेश चंद्र कर्दन और बसपा की पूजा अमरोही से चुनौती मिलेगी। सत्तारूढ़ दल ने फतेहपुर सीकरी सीट पर मौजूदा सांसद राज कुमार चाहर पर भरोसा जताया है, जो उन्होंने 2019 में कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर को हराकर जीती थी। इस बार सपा के साथ भारतीय गठबंधन के तहत कांग्रेस ने इस सीट से रामनाथ सिकरवार को मैदान में उतारा है.

बदायूं सीट पर सपा ने आदित्य यादव को मैदान में उतारा है, जो पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव के बेटे और अखिलेश के चचेरे भाई हैं। इस सीट पर पार्टी ने दो बार अपना उम्मीदवार बदला. शुरुआत में उसने इस सीट से पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव को अपना उम्मीदवार घोषित किया था लेकिन फिर उसने फिर से शिवपाल को अपना उम्मीदवार बना लिया।

हालांकि, स्थानीय भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सपा ने आदित्य यादव को मैदान में उतारा। 2019 में सीट जीतने वाली बीजेपी ने मौजूदा सांसद संघमित्रा मौर्य की जगह दुर्विजय शाक्य को टिकट दिया है।

हाथरस में भाजपा 1991 के बाद से कभी चुनाव नहीं हारी है। सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले पर भारी हंगामे के बावजूद, बीजेपी के राजवीर सिंह दिलेर ने 2019 में सपा के रामजी लाल सुमन को हराया था। दिलेर की दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत के बाद बीजेपी ने मौजूदा विधायक अनूप वाल्मिकी को मैदान में उतारा है, जिन्हें सपा के जसवीर वाल्मिकी और बीएसपी के हेमबाबू धनगर से चुनौती मिल रही है।

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