राष्ट्रवाद और वोट बैंक पर छिड़ी जंग; बीजेपी प्रवक्ता ने विपक्षी गठबंधन को घेरा.. 'वंदे मातरम' अब 'वोट बैंक मातरम' बना
मुंबई । देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक "वंदे मातरम" अब वोट बैंक मातरम बन गया है.. कुछ लोगों के लिए यह वोट बैंक ही सब कुछ बन गया है। यह आलोचना बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर की और कहा कि वंदे मातरम गाने के बंटवारे में देश के बंटवारे के बीज छिपे हैं। वे रामभाऊ म्हालगी मेमोरियल लेक्चर सीरीज़ के पहले भाग में "वंदे मातरम और राष्ट्रीय पुनरुत्थान" विषय पर एक सिंपोजियम( संगोष्ठी ) में बोल रहे थे।
महाराष्ट्र के सांस्कृतिक आंदोलन में अहम जगह रखने वाली रामभाऊ म्हालगी मेमोरियल लेक्चर सीरीज़ (40वां साल) 08 जनवरी से 14 जनवरी तक नौपाड़ा के सरस्वती स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स मैदान में हो रही है। गुरुवार को लेक्चर सीरीज़ का उद्घाटन बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला, डॉ. राजीव पुरी, सीनियर पत्रकार किरण तारे, मिलिंद भागवत और दूसरे गणमान्य लोगों ने दीप जलाकर किया। इस मौके पर व्याख्यान माला कमेटी के चेयरमैन, विधायक संजय केलकर, सेक्रेटरी शरद पुरोहित मंच पर मौजूद थे।
इस सिंपोजियम में पत्रकार किरण तारे और मिलिंद भागवत ने शहज़ाद पूनावाला और डॉ. राजीव पुरी से अलग-अलग मुद्दों पर बात करवाई। मुसलमानों को खुश करने और असल में मुस्लिम वोट बेस को बचाए रखने के लिए, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने खुद उस समय वंदे मातरम को दो हिस्सों में बांटा था। तभी अखंड भारत के दो हिस्से हुए। इस बारे में बताते हुए पूनावाला ने कहा कि 1937 में खुद नेहरू ने दबाव में आकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस और बनर्जी को चिट्ठी लिखकर वंदे मातरम को दो हिस्सों में बांट दिया था। बाद में "वंदे मातरम" को राष्ट्रगान मान लिया गया, लेकिन पूनावाला ने अफसोस जताया कि "वंदे मातरम" को मुस्लिम धर्म के खिलाफ बताकर गाने से मना करना दुख की बात है। नेहरू पर भाजपाक लगातार हमलों के सवाल पर उन्होंने दो टूक जवाब दिया कि यह लोगों को सही इतिहास बताने की कोशिश थी। इस पर डॉ. पुरी ने दर्शकों के सामने एक उदाहरण भी दिया कि उस समय के कांग्रेस नेताओं ने न सिर्फ इतिहास बदला बल्कि उसे तोड़-मरोड़कर पेश किया।
आज भी कांग्रेस भारतीयता को नकारने वालों का वोट बैंक बना रही है। कांग्रेस की भारतीयों को जातियों में बांटने और अपने खास वोट बैंक को मजबूत करने की पॉलिसी है। आज भी कुछ लोग ऐसी बदनामी कर रहे हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना अब सोनिया सेना बन गई है और "उर्दू भाईजान तंजीम" यानी यूबीटी बन गई है। उन्होंने कहा कि यह वोट बैंक की पॉलिटिक्स है। क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश-विदेश में मंदिर और चर्च जाते हैं, लेकिन मस्जिद नहीं जाते? इस सवाल पर कि मोदी भी मस्जिद जाते हैं, लेकिन मस्जिद में जाकर नमाज़ नहीं पढ़ते, क्योंकि वह हिंदू हैं। इसे समझाते हुए पूनावाला ने कहा कि पिछले 33 सालों से गुजरात में भाजपा सत्ता में है, लेकिन दूसरे सेक्युलर राज्यों के मुकाबले गुजरात में मुसलमान आर्थिक और हर तरह से मज़बूत हुए हैं।
