Thursday, June 13, 2024

मुज़फ़्फ़रनगर में DM ने दी लोकसभा प्रत्याशी को ‘जेल भेजने’ की धमकी, नहीं बना रहे मतगणना एजेंट के पास !

मुजफ्फरनगर। देश भर में चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठने के बीच अब मुजफ्फरनगर में भी जिला प्रशासन पर लोकसभा चुनाव में निष्पक्षता न बरतने के सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। एक लोकसभा प्रत्याशी ने मुज़फ्फरनगर के डीएम पर उन्हें जेल भेजने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने मतगणना एजेंट न बनाने की शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से भी की है।

मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे रेशु शर्मा ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखित शिकायत में बताया है कि वह मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी है। 18 अप्रैल की रात्रि में मतदान के दिन भ्रमण के लिए जारी होने वाले वाहन परमिट के लिए जिला प्रशासन ने उन्हें साफ इंकार कर दिया था और अब 4 जून को होने वाली मतगणना के लिए भी जिला प्रशासन उनके मतगणना एजेंटों के पास नहीं बना रहा है।

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रेशु शर्मा ने बताया कि 18 अप्रैल की रात्रि में उसे मतदान एजेंट बनाने के लिए जिला पंचायत सभागार में बुलाया गया था जहाँ जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी और एसएसपी अभिषेक सिंह समेत ज़िले के सभी प्रमुख अधिकारी मौजूद थे।वहां जिलाधिकारी ने उस समेत तीन अन्य निर्दलीय प्रत्याशियों को जमकर धमकाया था और उनसे जबरन पुलिस की धमकी देकर यह लिखाया था कि वह मतदान के दिन भ्रमण नहीं करना चाहते हैं, इसलिए उन्हें वाहन पास की जरूरत नहीं है।

रेशु शर्मा ने बताया कि रात 10 बजे से आधी रात साढ़े 3 बजे तक पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने पहले उसे जिला पंचायत दफ्तर में डराया और फिर शहर कोतवाली ले जाया गया और उसे धमकी दी गयी कि कल मतदान के दिन शाम 6 बजे तक घर से बाहर मत निकल जाना।  जिसके बाद सुबह 6 बजे से पहले एक सेक्टर मजिस्ट्रेट समेत एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी उसके आवास पर आ गए और उसे घर में नजरबन्द रखा गया और शाम को अपनी सुरक्षा में ही उससे मतदान कराया गया ,जिसकी वीडियो रिकॉर्डिग की और शाम को मतदान खत्म होने के समय भी उसे नजदीक के पोलिंग बूथ पर ले जाकर उसकी फोटोग्राफी कराई गई जिससे ये सबूत बनाया जा सके कि वह मतदान के दिन नजरबन्द नहीं था।

उसने बताया कि 18 अप्रैल की रात से पुलिस ने उसका मोबाइल जबरन बंद करा दिया था जिसे अगले दिन भी खोलने नहीं दिया गया। रेशु शर्मा ने बताया कि डीएम और एडीएम का व्यवहार बहुत अशोभनीय था और धमकी देने वाला था, डीएम बार बार उसे जेल भेजने की धमकी दे रहे थे जबकि एसएसपी का व्यवहार संयमित था।

रेशु शर्मा ने आरोप लगाया है कि अब जिला प्रशासन मतगणना में भी निष्पक्षता न बरतते हुए उन्हें अब मतगणना एजेंट के पास भी जारी नहीं कर रहा है। उन्होंने अपनी लिस्ट सिटी मजिस्ट्रेट विकास कश्यप को देने की कोशिश की तो उन्होंने लेने से इंकार कर दिया तो सभी कागज स्पीड पोस्ट से भेजे गए है।  रेशु ने बताया कि आज भी वह सुबह दस बजे से पौने चार बजे तक सिटी मजिस्ट्रेट दफ्तर में मौजूद था जिसकी पुष्टि सिटी मजिस्ट्रेट के यहाँ लगे सीसीटीवी से की जा सकती है।  वहां आज भी जब उसके मतगणना एजेंट के कागज नहीं लिए गए तो उसने स्पीडपोस्ट से भेजे है।

रेशु शर्मा ने  उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखित शिकायत भेजी है और सोशल मीडिया एक्स पर भी पोस्ट किया है।

इस सम्बन्ध में प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने रॉयल बुलेटिन को बताया कि किसी भी निर्दलीय प्रत्याशी को, उसके मतगणना एजेंट बनाने से इनकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की कोई शिकायत किसी प्रत्याशी द्वारा उनके संज्ञान में लाई जाएगी, तो उस पर तत्काल कार्रवाई कराई जाएगी और निष्पक्ष मतदान और मतगणना संपन्न कराने के लिए उनके अभिकर्ताओं को पास जारी किए जाएंगे।

जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी ने बताया कि यह विषय मेरे संज्ञान में नहीं है, ऐसा नहीं है, सभी प्रत्याशियों को मतगणना पास जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि निर्दलीय प्रत्याशियों को भी पास जारी किये गए है और बाकी सभी को भी  नियमानुसार पास जारी किये जायेंगे।

इसी बीच आपको यह भी याद दिला दे कि मुज़फ्फरनगर से बीजेपी के लोकसभा प्रत्याशी संजीव बालियान ने भी मतदान के बाद डीएम, एसएसपी और सीडीओ पर निष्पक्ष मतदान न कराने के आरोप लगाए थे। देखे संजीव बालियान के आरोप-

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