मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के शिक्षा विभाग द्वारा 27-28 फरवरी 2025 को आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “डिजिटल युग में उच्च शिक्षा का रूपांतरण” का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में प्रो. एमके गुप्ता (प्रो-वाइस चांसलर, सीसीएसयू) की अध्यक्षता में, मुख्य अतिथि शैलेंद्र जायसवाल (ईसी सदस्य एवं संरक्षक, सृजन संचार) सहित कई प्रतिष्ठित विद्वानों ने भाग लिया। प्रो. एम.के. गुप्ता (प्रो-वाइस चांसलर, सीसीएसयू) ने कहा कि उच्च शिक्षा में डिजिटल क्रांति न केवल शिक्षण और शोध को सशक्त बनाएगी, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय विश्वविद्यालयों की भूमिका को भी मजबूत करेगी।
प्रो. रजनी रंजन सिंह (दिल्ली विश्वविद्यालय), कीनोट स्पीकर ने कहा कि डिजिटल युग में शिक्षा को नवाचारों और तकनीकी उपकरणों के साथ एकीकृत करना आवश्यक है, जिससे शिक्षण अधिक प्रभावी और समावेशी बन सके। वहीं, प्रो. एस.सी. अग्रवाल (पूर्व डीन, सीएसजेएमयू, कानपुर) ने जोर दिया कि डिजिटल शिक्षा को सफल बनाने के लिए शिक्षकों और छात्रों को डिजिटल साक्षरता में निपुण बनाना आवश्यक है। प्रो. बीरपाल सिंह (निदेशक, अनुसंधान एवं विकास, भौतिकी विभाग, सीसीएसयू) ने विश्वविद्यालय की शोध प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय को NAAC A++ मान्यता मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की और इसे शिक्षा और अनुसंधान गुणवत्ता में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया, जिससे विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान और सुदृढ़ हुई है
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प्रो. राकेश कुमार शर्मा (डीन एवं अध्यक्ष, शिक्षा संकाय, सीसीएसयू) ने डिजिटल युग में उच्च शिक्षा को तकनीकी नवाचारों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा और वैश्विक अवसरों के द्वार खुलेंगे। डॉ. जितेंद्र सिंह गोयल (आयोजन सचिव) ने सम्मेलन को डिजिटल शिक्षा की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच बताया। इस सम्मेलन में प्रो. जे.एस. भारद्वाज (सह-संयोजक, सम्मेलन), प्रो. विजय जायसवाल (सह-संयोजक, सम्मेलन) और डॉ. वैभव सिंह (आयोजन सचिव) (शिक्षा विभाग, सीसीएसयू) ने सक्रिय भूमिका निभाई, साथ ही विभाग के शोधार्थियों ने भी आयोजन की व्यवस्थाओं, शोधपत्र प्रस्तुतियों और तकनीकी सत्रों के संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पहले दिन के तकनीकी सत्रों में डिजिटल शिक्षा, ई-लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल लर्निंग टूल्स के प्रभाव पर गहन चर्चा हुई।