Thursday, June 20, 2024

एटा से पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह चुनाव हारे, बेसिक शिक्षा मंत्री के पिता है !

एटा- उत्तर प्रदेश की एटा संसदीय सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) उम्मीदवार देवेश शाक्य ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गढ़ पर सेंध लगाते हुये मौजूदा सांसद एवं प्रत्याशी राजवीर सिंह ‘राजू’ को रोमांचक मुकाबले में शिकस्त झेलने पर मजबूर कर दिया।वे यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के पिता है.

देवेश शाक्य ने जीत क़े बाद एटा और कासगंज की जानता का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि ये जीत मेरी नहीं है एटा और कासगंज की जनता की जीत है। शाक्य ने एटा लोकसभा से दो बार लगातार सांसद रहे उत्तर प्रदेश क़े पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह क़े बेटे राजवीर सिंह को हराया है जो लगातार दो बार एटा लोकसभा सीट क़े सांसद थे और इनकी पकड़ और राजनीतिक रसूख बहुत अच्छा था।

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एटा लोकसभा से चुनाव जीतने पर देवेश शाक्य ने राजवीर सिंह क़े पैर छूकर आशीर्वाद लिया और राजवीर सिंह ने उनको जीत की बधाई दी। देवेश शाक्य ने राजवीर सिंह को लगभग 28000 से अधिक मतों से पराजित किया। उन्होंने कहा “ ये जीत मेरी नही है ये एटा और कासगंज की जनता की जीत है।” जब उनसे पूँछा गया कि जीतने क़े बाद उनकी क्या प्राथमिकताएं होंगीं तो उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद एटा लोकसभा क़े विकास क़े लिए एक मेनिफेस्टों बनाया था उसी मेनिफेस्टों क़े अनुरूप कार्य करूँगा। बिजली, सड़क, पानी, स्कूल, कॉलेज,गंगा में आने वाली बाढ क़े लिए बाँध बनाने क़े प्रमुख मुद्दे हैं।

इस अवसर पर देवेश शाक्य ने अपने भाई स्वर्गीय विनय शाक्य को याद करते हुये कहा कि ये उनको सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि एटा और कासगंज की जनता ने उन्हें जो प्यार दिया है उसके वो आजीवन ऋणी रहेंगे। एटा लोकसभा से बीजेपी की हार का मुख्य कारण कुछ बीजेपी नेताओं और विधायकों क़े भितरघात को माना जा रहा है।

एटा संसदीय सीट से जीत हासिल पहली दफा जीत हासिल करने वाले देवेश शाक्य मूल रूप से इटावा जिले के निवासी है। देवेश शाक्य अपनी राजनीतिक पारी में पहली दफा जिला पंचायत सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए। देवेश जिला पंचायत अध्यक्ष का भी चुनाव लड़ चुके है लेकिन उनको कामयाबी नहीं मिली । 2012 में देवेश औरैया जिले की विधूना विधानसभा से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा।

देवेश शाक्य ने जिस अंदाज में अपने पहले संसदीय चुनाव में दिग्गज माने जाने वाले राजवीर सिंह राजू को पराजित किया है, ठीक इसी तरह उनके दिवंगत बड़े भाई विनय शाक्य ने अपने पहले विधानसभा चुनाव 2002 में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धनीराम वर्मा को पराजित किया था ।

पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह राजू की हार बड़े उलटफेर का प्रतीक मानी जा रही है। सपा ने अपने पीडीए फार्मूले के तहत एटा संसदीय सीट से पहली दफा देवेश शाक्य को चुनाव मैदान में उतारा। सपा उम्मीदवार देवेश शाक्य ने जोरदारी से चुनाव लड़ा। सात मई को मतदान के बाद ही इस बात की चर्चाएं इस तरह से आम हो चली थी कि एटा संसदीय सीट पर बड़ा उलट फेर इस संसदीय चुनाव में हो सकता है और वास्तव में ऐसा हुआ भी है।

मतगणना के वक्त कभी राजवीर आगे रहे तो कभी देवेश आगे रहे। आखिरकार जब फाइनल नतीजा सपा के देवेश शाक्य के पक्ष में आ खड़ा हुआ है। राजनीतिक दृष्टि से एटा लोकसभा को भाजपा का गढ़ माना जाता है। पूर्व सीएम कल्याण सिंह के बाद उनके बेटे राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया यहां से सांसद बने। इस बार भी भाजपा ने उन पर भरोसा जताया है। वहीं सपा ने शाक्य वोटर्स के मद्देनजर देवेश शाक्य को मैदान में उतारा है। बसपा से मोहम्मद इरफान लड़ रहे हैं। एटा में तीसरे चरण में 7 मई को मतदान हुआ, जिसमें 59 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

एटा लोकसभा पर लंबे समय से भाजपा का ही दबदबा है। महादीपक सिंह शाक्य यहां से छह बार सांसद रहे। उनके बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम कल्याण सिंह भी 2009 में सांसद निर्वाचित हुए। उनके बाद बेटे राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया 2014 और 2019 में सांसद बन चुके हैं। लोध, शाक्य और यादव बहुल इस सीट पर समाजवादी पार्टी ने इटावा की राजनीति में सक्रिय जिला पंचायत सदस्य देवेश शाक्य को यहां चुनावी मैदान में उतारा है। हालांकि बाहरी प्रत्याशी दिए जाने से नाराज सपा के पूर्व प्रत्याशी देवेंद्र यादव ने भाजपा का दामन थाम लिया है।

एटा लोकसभा सीट में एटा जिले की एटा सदर, मारहरा के साथ ही कासगंज जनपद की सदर, अमांपुर, पटियाली विधानसभा सीट भी शामिल है। यहां से शाक्य वोटर्स सबसे अधिक हैं। भाजपा सवर्ण, लोधी और शाक्य मतदाताओं के समीकरण पर यहां चुनाव लड़ती है। वहीं सपा यादव, मुस्लिम का मेल बैठाती थी। इस बार शाक्य प्रत्याशी को लाकर यादव, मुस्लिम और शाक्य समीकरण बनाया गया है।

2019 में भाजपा ने एटा सीट से राजवीर सिंह पर भरोसा जताते हुए फिर से प्रत्याशी बनाया था। उन्हें सपा-बसपा गठबंधन की ओर से देवेंद्र सिंह यादव ने टक्कर दी लेकिन एक लाख 22 हजार मत के अंतर से हार गए। भाजपा के राजवीर को 5 लाख 45 हजार 348 वोट मिले। वहीं सपा कैंडिडेट देवेंद्र को 4 लाख 22 हजार 678 वोट मिले।

साल 2014 में पूरे उत्तर प्रदेश में मोदी लहर थी। एटा में भी भाजपा की धूम देखने को मिली। 2014 में भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार राजवीर सिंह राजू भैया ने सपा के देवेंद्र यादव को दो लाख वोट के अंतर से हराया। राजवीर को 4 लाख 74 हजार 978 वोट मिले, जबकि देवेंद्र के खाते में 2 लाख 73 हजार 977 वोट आए। तीसरे नंबर पर बसपा के नूर मोहम्मद खान रहे, जिन्हें 1 लाख 37 हजार वोट मिले।

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