Tuesday, February 27, 2024

चंडीगढ़ महापौर चुनाव में गड़बड़ी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा-“लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देंगे”, 19 को होगी फिर सुनवाई

नयी दिल्ली- उच्चतम न्यायालय ने चंडीगढ़ के महापौर का चुनाव कराने में संबंधित निर्वाचन अधिकारी पर मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ कर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को विजयी घोषित करने के आरोपों पर सोमवार को सख्त टिप्पणियां कीं और कहा कि वह “इस तरह से लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देगा।”

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मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने चुनाव से संबंधित मूल दस्तावेजों को संरक्षित करने और नगर निकाय की बैठक स्थगित रखने का निर्देश देते हुए कहा कि निर्वाचन अधिकारी ने जिस तरह से चुनाव कार्यवाही का संचालन किया, उसके खिलाफ मुकदमा चलाने की जरूरत है।

पीठ ने महापौर पद पर हारने वाले आम आदमी पार्टी (आप) पार्षद कुलदीप कुमार की याचिका पर संबंधित पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद आदेश दिया कि महापौर चुनाव मतपत्र, इससे संबंधित वीडियोग्राफी और अन्य सामग्री सहित चुनाव प्रक्रिया का पूरा दस्तावेज पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

इस चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार मनोज कुमार सोनकर को उनसे अधिक पार्षदों की संख्या बल वाले कांग्रेस-आप संयुक्त गठबंधन के उम्मीदवार श्री कुमार के मुकाबले विजयी घोषित किया गया था।

निर्वाचन अधिकारी द्वारा आप-कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार द्वारा प्राप्त 20 मतों में से आठ वोटों को रद्द घोषित करने के बाद भाजपा के श्री सोनकर ने जीत हासिल की थी। कांग्रेस-आप उम्मीदवार श्री कुमार को मिले 12 वोटों के मुकाबले 16 वोट हासिल करने के बाद भाजपा के श्री सोनकर को पिछले मंगलवार को महापौर चुना गया। इस प्रक्रिया में आठ वोट अवैध घोषित कर दिये गये।

श्री कुमार ने निर्वाचन अधिकारी के इस फैसले को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी थी, जहां तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटा आया था।

महापौर चुनाव परिणाम पर रोक लगाने की मांग वाली श्री कुमार की याचिका उच्च न्यायालय ने तत्काल कोई राहत नहीं दी थी। चुनाव के बाद भाजपा उम्मीदवार को चंडीगढ़ नगर निगम का महापौर घोषित किया गया था।

भाजपा की जीत पर सवाल उठाने वाली श्री कुमार की याचिका पर उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह ही नोटिस जारी किया था और मामले को तीन सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।

शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली श्री कुमार की याचिका पर सोमवार को सुनवाई की। शीर्ष अदालत की पीठ ने मामले में प्रतिवादियों का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि यह स्पष्ट है कि निर्वाचन अधिकारी ने लोकतंत्र की ‘हत्या’ और ‘मजाक’ कर मतपत्रों को विकृत किया। उन पर मुकदमा चलाने की जरूरत है।

श्री मेहता ने शीर्ष अदालत से पूरे घटना के वीडियो की जांच करने की गुहार लगाई।

पीठ ने याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ए एम सिंघवी के मतदान के दिन के वीडियो का जिक्र करने पर पूछा, “वह (निर्वाचन अधिकारी) कैमरे की तरफ क्यों देख रहे हैं? यह लोकतंत्र का मजाक है। निर्वाचन अधिकारी लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं, हम स्तब्ध हैं।”

पीठ ने कहा,“क्या यह निर्वाचन अधिकारी का व्यवहार है…कृपया उन्हें बताएं कि उच्चतम न्यायालय उस पर नजर रख रहा है।” शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह से लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देगी।

क्या है पूरा मामला
30 जनवरी को हाईकोर्ट के आदेश पर चंडीगढ़ मेयर चुनाव हुआ था। इसमें भाजपा प्रत्याशी मनोज सोनकर ने चार मतों से जीत दर्ज की थी। भाजपा के पास कुल 14 पार्षद थे। वहीं एक मत सांसद किरण खेर का था। भाजपा प्रत्याशी को कुल 16 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस-आप प्रत्याशी को 12 मत मिले थे। जबकि गठबंधन के पास कुल 20 मत थे। चुनाव के दौरान आठ मतों को अमान्य करार दिया गया था। इस वजह से मेयर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी।
वायरल हुआ था वीडियो
हाईकोर्ट के आदेश पर चुनाव प्रक्रिया की पूरी वीडियोग्राफी की गई थी। कुछ समय बाद पीठासीन अधिकारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें वह कथित रूप से मतपत्रों पर पेन चलाते दिख रहे हैं। इसके बाद आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने भाजपा पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाया। मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा। मगर हाईकोर्ट ने कोई राहत नहीं दी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

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