Friday, April 4, 2025

अनमोल वचन

अधिकांश लोगों का कहना है कि जो प्रारब्ध में लिखा है वह तो हमें मिलना ही है, उसके अनुसार प्राप्त होगा न उससे कम और न उससे अधिक इसलिए अधिक हाथ-पांव मारने से क्या लाभ। यह बताने की अथवा उपदेश करने की आवश्यकता ही नहीं कि प्रारब्ध मनुष्य के किये हुए कर्मों का फल है। आज वही मिलेगा जैसा अपने पूर्व कर्मों में किया है और जो आज करेंगे वह आगे के प्रारब्ध की रचना करेगा।

किन्तु वह भी पुरूषार्थ करने से ही मिलेगा। मान लो किसी ने आपको एक लाख रूपये का चैक दिया है और उसे अपनी जेब में रखकर बिस्तर में लेट जाये कि मैं तो लखपति हो गया तो क्या आप लखपति बन गये। आपको उस एक लाख को प्राप्त करने के लिए भी पुरूषार्थ करना होगा। आपको बैंक जाना होगा, अपना खाता खुलवाना होगा। किसी खातेदार से स्वयं को प्रमाणित कराना होगा, तब आप उस चैक को अपने खाते में जमा करोगे।

यह सब कुछ करने के पश्चात ही वह लाख रूपया आपको मिल पायेगा। यदि यह सब न किया जाये तो आप लखपति नहीं मात्र एक कागज के छोटे से टुकड़े के ही स्वामी हैं। तात्पर्य यह कि प्रारब्ध को भुनाने के लिए भी पुरूषार्थ करना अनिवार्य है।

- Advertisement -

Royal Bulletin के साथ जुड़ने के लिए अभी Like, Follow और Subscribe करें |

 

Related Articles

STAY CONNECTED

75,563FansLike
5,519FollowersFollow
148,141SubscribersSubscribe

ताज़ा समाचार

सर्वाधिक लोकप्रिय