गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की 168 वीं बोर्ड बैठक मेरठ मंडल कार्यालय के सभागार में हुई। बैठक की अध्यक्षता जीडीए बोर्ड अध्यक्ष और मेरठ मंडलायुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोद ने की। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने प्राधिकरण अध्यक्ष और मेरठ मंडलायुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोद का पौधा देकर स्वागत किया। प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में जनपद के 61 गांवों को जीडीए ने अपनी सीमा क्षेत्र में शामिल करने का फैसला लिया। जिन 61 गांवों को जीडीए की सीमा में शामिल किया जाएगा वो ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित हैं। ये सभी गांव अब गाजियाबाद विकास प्राधिकरण का हिस्सा होंगे। अभी तक ये सभी 61 गांव जिला पंचायत के अंतर्गत थे।
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जीडीए बोर्ड बैठक में जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स, जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह, जीडीए अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह, प्रभारी चीफ इंजीनियर मानवेंद्र कुमार सिंह, नगर निगम के चीफ इंजीनियर एनके चौधरी, जीडीए बोर्ड मेंबर पवन गोयल भी उपस्थित रहे।
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जीडीए की 168 वीं बोर्ड बैठक में कुल 20 प्रस्ताव रखे गए थे। जिनमें से बोर्ड में 11 को स्वीकृति मिली है। जीडीए बोर्ड बैठक में स्वीकृति के बाद इस प्रस्ताव को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के पास भेजा जाएगा। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के अनुमोदन के बाद इसको शासन के पास अधिसूचित करने के लिए भेजा जाएगा। अधिसूचना जारी होने के बाद सभी 61 गांव जीडीए का हिस्सा बन जाएंगे और इन्हें सुनियोजित तरीके से विकसित किया जाएगा।
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के मीडिया प्रभारी रूद्रेश शुक्ला ने बताया कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ 500-500 मीटर के दायरे में आने वाले 61 गांवों को जीडीए में शामिल करने की मंजूरी बोर्ड बैठक में मिली है। इनमें ईस्टर्न पेरिफेरल किनारे के 29 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के किनारे के 32 गांव जीडीए में शामिल किए जाएंगे।
गांवों के शामिल होने से इनमें विकास की रफ़्तार तेज होगी। सबसे अधिक फायदा इंडस्ट्री लगाने वालों को होगा। जीडीए में गांवों के शामिल होने के बाद इंडस्ट्री के लिए आसानी से जमीन मिल सकेगी। जिसकी वजह से रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। इतना ही नहीं गाजियाबाद में अपने घर का सपना देखने वालों को फ्लैट और भूखंड मिल सकेंगे।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के किनारे बसे गांवों के जीडीए में शामिल होने के बाद इंडस्ट्री सेक्टर में बूम आएगा। इन गांवों में कम लागत में जमीन खरीदकर बड़ी कंपनियां इंडस्ट्री लगा सकेंगी। इससे ग्रामीण युवाओं को तो रोजगार मिलेगा ही साथ ही शहरी पलायन पर भी रोक लगेगी। ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के किनारे तेजी से विकास होगा।
जीडीए बोर्ड बैठक में 61 गांवों के प्राधिकरण में शामिल होने से जमीन के दामों में उछाल आएगा। गाजियाबाद में इस समय वैसे भी जमीन के दाम काफी ऊपर हैं। 61 गांवों को प्राधिकरण में शामिल किए जाने की अधिसूूचना जारी होने के बाद इन गांवों की जमीन के दाम आसमान छुएंगे। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के किनारे के गांवों में शहरों जैसा विकास होगा। लोग इन गांव में रहने के लिए फ्लैट और भूखंड खरीद सकेंगे।
जीडीए की बोर्ड बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 2623 करोड़ रुपये का बजट पास किया है। जीडीए अपरसचिव प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि नक्शा और संपत्ति बिक्री से नियमित आय जीडीए को हो रही है। इसके अलावा हरनंदीपुरम से 400 करोड़ रुपये की आय, स्टांप ड्यूटी से करीब 200 करोड़ रुपये की आय और आयकर विभाग से 450 करोड़ रुपये का रिफंड का अनुमान है।