पालक की खेती से किसानों की जेब भरने का सुनहरा मौका सर्दियों में मिलती है बंपर कमाई
सर्दियों का मौसम हमेशा से किसानों के लिए खास रहा है क्योंकि इस समय कुछ फसलें ऐसी होती हैं जो कम समय में तैयार होकर अच्छा मुनाफा दिलाती हैं। इन्हीं में से एक है पालक की फसल। हरी पत्तेदार सब्जियों में पालक की मांग पूरे साल रहती है लेकिन दिसंबर का महीना इसके लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। इस समय पालक की पत्तियाँ मोटी हरी और चमकदार बनती हैं और बाजार में इसकी खपत बहुत तेज रहती है।
खेत की तैयारी से बढ़ता है उत्पादन और मुनाफा
पालक की फसल ज्यादा मेहनत वाली नहीं है लेकिन शुरुआत में खेत की तैयारी अच्छी हो तो उत्पादन दोगुना तक बढ़ सकता है। किसानों को पहले खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए जिससे मिट्टी भुरभुरी बने। पालक को हल्की दोमट और उपजाऊ मिट्टी बेहद पसंद है। बुआई से पहले खेत में अच्छी सड़ी हुई गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालना बहुत जरूरी है। इससे मिट्टी नरम रहती है और जड़ें तेजी से फैलती हैं। रासायनिक खाद की आवश्यकता भी कम पड़ती है जिससे लागत अपने आप घट जाती है।
आजकल बाजार में पालक की कई तेजी से बढ़ने वाली किस्में उपलब्ध हैं। कई नई वैरायटी ऐसी विकसित की गई हैं जो जल्दी उत्पादन देती हैं और पत्तियाँ अधिक निकलती हैं। किसान चाहे तो अपने नजदीकी कृषि केंद्र से सलाह लेकर अपने क्षेत्र के अनुसार सही वैरायटी का चुनाव कर सकते हैं।
बुआई का सही तरीका जिससे फसल जल्दी और मजबूत बढ़े
पालक के बीज छोटे होते हैं इसलिए इन्हें हल्की नमी वाली मिट्टी में बोया जाना चाहिए। बीज को गहराई में डालना ठीक नहीं होता। हल्का दबाकर ऊपर से सिंचाई कर देने से अंकुरण अच्छा होता है। दिसंबर में ठंड अधिक रहती है इसलिए दिन में हल्की सिंचाई करते रहना जरूरी है जिससे मिट्टी में नमी बनी रहे।
सिंचाई और देखभाल से फसल की बढ़वार तेज होती है
पालक को बहुत अधिक पानी नहीं चाहिए। बस मिट्टी सूखने न पाए इसका ध्यान रखना होता है। हर चार से पांच दिन में हल्की सिंचाई काफी है। पालक पर रोग और कीट बहुत कम लगते हैं जिससे दवाई की जरूरत भी नहीं के बराबर पड़ती है। इससे खेती की लागत काफी कम हो जाती है।
अगर खेत में खरपतवार अधिक हैं तो पंद्रह से बीस दिन बाद एक बार निराई गुड़ाई करना काफी है। इससे पौधे खुलकर बढ़ते हैं और पत्तियाँ अधिक चौड़ी बनती हैं।
कटाई और बिक्री जिससे मिलता है तुरंत लाभ
पालक की फसल तीस से चालीस दिन में कटाई योग्य हो जाती है। जब पत्तियाँ मोटी चमकदार और बड़ी दिखने लगें तब कटाई कर लेनी चाहिए। किसान चाहे तो पूरी फसल एक बार में काट सकते हैं या जरूरत के अनुसार ऊपर का हिस्सा काटकर दोबारा बढ़ने दे सकते हैं। यह तरीका अक्सर अधिक लाभ देता है क्योंकि एक ही खेत से कई कटिंग मिल जाती हैं और बाजार में लगातार बिक्री होती रहती है।
