Friday, April 4, 2025
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यूपी के स्कूलों में नीदरलैंड्स का अर्ली वार्निंग सिस्टम लागू करने पर विचार, बेसिक शिक्षा मंत्री मार्च में जाएंगे नीदरलैंड्स

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार नीदरलैंड्स के अर्ली वार्निंग सिस्टम को प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में लागू करने पर विचार कर रही है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रदेश में हर बच्चे को शिक्षित करने के इरादे से कई अवेयरनेस कैंपेन चलाए जा रहे हैं, जिनके तहत पेरेंट्स को बच्चों के जीवन में शिक्षा का महत्व समझाया जा रहा है। हर तबके के बच्चों को स्कूल लाने के साथ-साथ सरकार का फोकस उन बच्चों को भी स्कूल वापस लाने का है, जो किसी न किसी वजह से बीच में ही स्कूल छोड़ देते हैं। अब योगी सरकार इसके लिए अभियान शुरू करने जा रही है। इस अभियान के अंतर्गत नीदरलैंड्स के अर्ली वार्निंग सिस्टम को उत्तर प्रदेश में लागू किए जाने की रूपरेखा बनाई जा रही है।

उन्होने बताया कि इस सिस्टम को समझने के लिए बेसिक शिक्षा मंत्री समेत 12 लोगों की टीम मार्च में नीदरलैंड्स जाएगी। सिस्टम को समझने के बाद जब यह टीम वापस लौटेगी तब इसे किस तरह प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में लागू किया जाए, इस पर गहन विमर्श होगा। संभावना है कि इस साल के अंत तक इस सिस्टम के माध्यम से स्कूल बीच में छोड़ने वाले बच्चों की मॉनीटरिंग और ट्रैकिंग शुरू हो जाएगी।

उल्लेखनीय है कि बेसिक शिक्षा विभाग हर वर्ष हाउसहोल्ड सर्वे कराता है। इस सर्वे के अनुसार 2020-21 में 4.81 लाख, 2021-22 में 4 लाख से अधिक और 2022-23 में 3.30 लाख बच्चे बीच में स्कूल छोड़ गए। छह से 14 वर्ष की आयु वाले इन बच्चों का दोबारा स्कूल में दाखिला कराया गया है और अब प्रदेश सरकार ऐसे सिस्टम पर काम कर रही है ताकि बच्चों के स्कूल बीच में छोड़ते ही 40 दिन के अंदर इसकी ट्रैकिंग शुरू हो जाए और उनकी समस्या का निराकरण करते हुए उनकी जल्द से जल्द स्कूल में वापसी कराई जा सके।

प्रदेश के स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने बताया कि नीदरलैंड के अर्ली वार्निंग सिस्टम की तर्ज पर यूपी के परिषदीय स्कूलों में भी अनुपस्थित रहने वाले बच्चों अर्थात आउट ऑफ स्कूल बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। जो बच्चे किसी भी कारण स्कूल में लगातार अनुपस्थित रह रहे हैं, उनके अभिभावकों से बात करके उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे अपने बच्चों को स्कूल ज़रूर भेजें। एक निर्धारित समय तक स्कूल न आने या स्कूल में कम समय देने वाले बच्चों की जानकारी जुटाई जाएगी।

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