सुप्रीम कोर्ट के कुत्ता हटाओ आदेश पर देशव्यापी बहस: यूथ कांग्रेस बोली- बेजुबानों की आवाज बनकर लड़ेंगे, यह फैसला वैज्ञानिक और कानूनी रूप से गलत
Mumbai News: मुंबई यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष जीनत शबरीन ने कहा कि वे उन बेजुबान कुत्तों की आवाज बनने आए हैं जिनके पास अपना बचाव करने का कोई साधन नहीं है। उन्होंने पूछा, “इन हजारों कुत्तों को ले जाने और रखने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर कहां है? उन्होंने आरोप लगाया कि स्टेरिलाइजेशन और इम्यूनाइजेशन को वैज्ञानिक और मानवीय तरीका माना जाने के बावजूद “कुत्तों को हटाने और खत्म करने” का माहौल बनाया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट से तुरंत रोक और पुनःसुनवाई की मांग
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप
यूथ कांग्रेस का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पास करते समय संबंधित पक्षों और उनके वकीलों को सुना ही नहीं। यह प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है, जिसने पूरे मामले पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
कानूनी फ्रेमवर्क के विरुद्ध बताया गया आदेश
पत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश PCA एक्ट और 2023 के Animal Birth Control Rules के खिलाफ है, जो कुत्तों को हटाने के बजाय मानवीय तरीके से उनका उपचार और नियंत्रण सुनिश्चित करते हैं। CNVR पद्धति को अदालत ने दरकिनार कर दिया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को बताया बड़ा जोखिम
यूथ कांग्रेस का कहना है कि देश में न तो पर्याप्त शेल्टर हैं और न ही पाउंड- ऐसे में कोर्ट द्वारा तय किए गए पशु कल्याण मानकों का पालन करना असंभव है। इससे कुत्तों को अनावश्यक कष्ट होगा, जो PCA एक्ट के भी खिलाफ है।
एनिमल एक्टिविस्ट्स भी कर रहे विरोध
एनिमल-वेलफेयर एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह आदेश मानव सुरक्षा के हित में तो है, परंतु यह दशकों पुराने कानूनी, नैतिक और वैज्ञानिक सिद्धांतों से टकराता है। अधूरी सुविधाओं और संसाधनों की कमी से जानवरों की पीड़ा बढ़ सकती है।
हम आवाजहीनों की आवाज बने रहेंगे
शबरीन ने कहा कि यह फैसला कई बड़े राजनीतिक अभियानों को भी पीछे छोड़ चुका है, परंतु उनकी प्राथमिकता उन जानवरों के अधिकारों की सुरक्षा है जो अपनी बात खुद नहीं रख सकते।
