सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान के मतांतरण रोधी कानून पर बड़ी सुनवाई-संविधानिक वैधता पर उठे गंभीर सवाल
Rajasthan News: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ अनलॉफुल कन्वर्जन ऑफ रिलिजन एक्ट, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर औपचारिक जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले को देशभर के ऐसे ही मुद्दों से जुड़ी लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ते हुए अगली सुनवाई की दिशा तय की।
याचिकाकर्ताओं का दावा-कानून संविधान के खिलाफ
सॉलिसिटर जनरल का पक्ष-पहले से लंबित हैं समान मामले
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि समान कानूनी मुद्दों पर कई याचिकाएं पहले से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि इस नई याचिका को भी उन्हीं मामलों के साथ निपटाया जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया एकरूपता के साथ आगे बढ़ सके।
राजस्थान सरकार को दूसरी बार नोटिस
17 नवंबर को भी सुप्रीम कोर्ट ने अधिनियम को चुनौती देने वाली एक अलग याचिका पर राजस्थान सरकार से जवाब मांगा था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जब तक राज्य आवश्यक स्पष्टीकरण और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराएंगे, तब तक कानून पर निर्णय नहीं लिया जा सकता।
देशभर में मतांतरण कानूनों की समीक्षा-कई राज्य आए रडार पर
सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने पहले ही नौ राज्यों-उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, हरियाणा, झारखंड और कर्नाटक-के मतांतरण रोधी कानूनों पर सरकारों से जवाब मांगा था। कोर्ट ने कहा था कि वह इन कानूनों के संचालन पर रोक लगाने के अनुरोध पर तभी विचार करेगा, जब संबंधित राज्य विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करेंगे।
