मेरठ। फर्जी स्टांप घोटाले का मेरठ रजिस्ट्री कार्यालय ने पर्दाफाश कर दिया। शहर के बिल्डर के मैसर्स पर्व एसोसिएट्स, मैसर्स वेद एसोसिएट्स और मैसर्स वासु एसोसिएट्स ने 7.31 करोड़ रुपये का घोटाला किया है।
छह रजिस्ट्रार की जांच में खुलासा हुआ कि तीन साल में 997 फर्जी स्टांप लगाकर रजिस्ट्री की गईं। स्टांप आयुक्त के निर्देश पर सिविल लाइन थाने में फर्माें के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसकी रिपोर्ट स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल को भेजी गई है।
पांच हजार से ऊपर के फर्जी स्टांप से रजिस्ट्री होने का मामला पहली बार जून 2023 में सामने आया था। सहायक स्टांप आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार ने पहला मुकदमा सिविल लाइन थाने में दर्ज कराया और जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी।
जिलाधिकारी दीपक मीणा द्वारा स्टांप घोटाले की गंभीरता को देखते हुए शासन को जानकारी दी। स्टांप आयुक्त ने प्रदेश के सभी जनपदों में तीन-तीन साल के स्टांप की जांच कराने के निर्देश कर दिए। मेरठ में तीन साल में 997 फर्जी स्टांप से रजिस्ट्री होना पाया गया। इसमें सभी फर्जी स्टांप में कोषागार की मुहर व हस्ताक्षर मिले।
इस गिरोह ने राज्य सरकार को आर्थिक रूप से 7,3145000 रुपये की क्षति पहुंचाई है। जांच में सामने आया कि विशेष रूप दो या तीन विलेखों को छोड़कर उक्त संबंध विलेख एक ही अधिवक्ता द्वारा निष्पादित कर उपनिबंधक कार्यालय में पंजीकृत कराए गए है।
उपनिबंधक सदर व सरधना की जांच रिपोर्ट में 997 विलेख में वर्णित क्रेतागण मैसर्स पर्व एसोसिएट्स, मैसर्स वेद एसोसिएट्स और मैसर्स वासु एसोसिएट्स आदि के विरुद्ध सिविल लाइन में धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (अनैतिक तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार करना), 468 (जालसाजी करना), 471 (जाली दस्तावेज को असली बताकर प्रस्तुत करना) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कराया गया है।
जिलाधिकारी ने इस संबंध में रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारियों से बातचीत की। पुलिस द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। अभी तक जांच में 997 फर्जी स्टांप के मामले में पुलिस चुप्पी साध रही थी। जिस पर जिलाधिकारी ने एसएसपी को फोन करके इस मामले में कार्रवाई करने की बात कही और शासन को रिपोर्ट जाने का हवाला दिया। जिसके बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।