मुजफ्फरनगर। वैसे तो भगवान शंकर की पूजा में बहुत लंबा चौड़ा अनुष्ठान होता है लेकिन जो जितना बड़ा होता है उतना ही सहज भी होता है सामान्य शिव भक्त जो बहुत अधिक साधन नहीं जुटा सकता उसके लिए भी भगवान ने सहजता दी है हमारे सनातन के सभी देवताओं में महादेव ही एकमात्र ऐसे हैं जो साधारण जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं।
महामृत्युंजय सेवा मिशन अध्यक्ष संजीव शंकर ने बताया कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए और अपने-अपने मनोरथ की सिद्धि के लिए अलग-अलग वस्तुओं से अभिषेक और श्रृंगार इत्यादि बताए गए हैं जैसे दूध, दही,घी, शहद और गंगाजल यह पंचामृत है, धन प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से, शत्रु नाश के लिए सरसों के तेल से विशेष रुद्राभिषेक किया जा सकता है।
भगवान शंकर को सजाया भी जा सकता है केवल केतकी का ही एकमात्र पुष्प है जो भगवान शंकर पर नहीं चढ़ता है ,उसके अलावा कनेर, धतूरा, आक, शमी, कमल, गुड़हल, और पारिजात इत्यादि ऐसे पुष्प में जो निश्चित संख्या में चढ़ाने चाहिए, वही बेलपत्र, शमी,दूर्वा,धतूरे,आंकड़े,पीपल इत्यादि का विशेष महत्व है। शिवरात्रि को भगवान शिव अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट हुए थे अतः रात्रि के समय दीप प्रज्वलित कर शिवालय में रोशनी करने का विशेष महत्व है।