मुजफ्फरनगरः मेहता क्लब, नई मंडी में कल्पद्रुम महामंडल विधान का भव्य ऐतिहासिक आयोजन का हवन के साथ समापन
मुजफ्फरनगर। परमपूज्य जिनागम पंथ प्रवर्तक भवलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज के सानिध्य में मेहता क्लब नई मंडी में कल्पद्रुम महामंडल विधान का भव्य ऐतिहासिक आयोजन का हवन के साथ समापन हुआ।
भाग्यशाली वहीं है जिसके हृदय में भक्ति का उदय होता है।

भावलिंगी संत दिगम्बराचार्य श्री विमर्श सागर की महामुनिष्ण
35 पीछीधारी संयमियों के सानिध्य में प्रथम बार सम्पन्न हुयी" कल्पद्रुम महाविधान की आराधना
बंगा जिसके इदय में भक्ति का उदय होता है नहीं भाग्यवान होता है। लोग कहने हैं कि जिसके पाल धन-संपदा है वही सौभाग्यवान होता है किन्तु सत्यता यही है जिसके अंदर भक्ति का वैभव नहीं है वह मानव धन-संपन्न होने पर भी भाग्यहीनही है। ऐसा मांगलिक धर्मोपदेश, मुजाफरनगर के "कल्पदुम महामण्डल विधान के संपन्नग दिवस में 30 नवम्बर 2015 को विशाल धर्मसभा के मध्य परमपूज्य भावलिंगी संत दिगम्बराचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महामुनिराज ने दिया ।

35 पीछी धारी संयमियों के साथ मुजफ्फरनगर में विराजमान आचार्य श्री ने उद्बोधन देते हुए कहा बन्धुओं। जब आप घर में भोजन करने के लिए थाली पर बैठो तो यह मत सोचना कि मैं पेट भरने के लिए भोजन कर रहा हूँ अपितु यह न्चिन्तवन करते हुए भोजन ग्रहण करना कि "मैं जिनेन्द्र भगवान की भक्ति करने के लिए भोजन ग्रहण कर रहा हूँ" ध्यान रखना आपका भोजन करने का प्रयोजन समीचीन होते ही आपका भोजन भी कर्म निर्जरा का साधन बन जायेगा । आचार्यश्री ने कहा कि कल्पद्रुम महाविधान की सफलता पर प्रकाश डालते हुए प्रत्येक पदार्थ अपनी गुणवत्ता से ही महत्वशाली होता है और आगम वाक्य है "गुणों में अनुराग का होना भक्ति है"। बन्धुओ ! कल्पद्रुम महामण्डल विधान की आपके जीवन में तब ही सार्थकता होगी जब आप पूज्य पुरुषों के गुणों को देखना सीख जायेंगे। ध्यान रखो, जब आप भक्ति करने के लिए उपस्थित हों तब पूज्य जनों के चेहरे मत देखना, मात्र उनके गुणों की ही आराधना करना, आपकी भक्ति सार्थक हो जायेगी ।
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आचार्य प्रवर ने मंगल आशीष देते हुये कहा मुज़फ़्फ़रनगर में श्री 2008 कल्पद्रुम महामण्डल विधान की आराधना निश्चित ही सफलतम ऊंचाइयों को प्राप्त हुयी है। इस महा-आराधना में कृत-कारित अनुमोदना से भाग लेने वाले सभी भक्तों को मेरे मंगल-मंगल शुभाशीष है, सबके जीवन में सुख-शान्ति-समृद्धि और धर्म की वृद्धि हो !
मध्याहून बेला में कल्पद्रुम महामण्डल विधान की सम्पूर्णता हुयी साथ ही हवन की मंगल आहूतियों के द्वारा महा अनुष्ठान की सम्पन्नता हुयी ।
14 दिसम्बर को धर्मनगरी बड़ौत में होगा परमपूज्य आचार्य श्री विमर्रासागर जी महामुनिराज की " विमर्श संयमीत्सव * - 28 वां मुनि दीक्षा दिवस । साथ ही जिनागम पंधी श्रावक संघ दिल्ली प्रदेश का 100 वाँ जिनाभिषेक महोत्सव "देखेगा भारत "
13 दिसम्बर 2025 को 35 पीछी सहित धर्म नगरी बड़ौत में भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज भव्य मंगल पदार्पण करेंगे !
श्री कल्पद्रुम महामण्डल विधान के मुख्य संयोजक श्रीमान जिनागमपंथी शीतल जैन (C.A) व अमित कुमार जैन एडवोकेड के साथ सम्पूर्ण जैन समाज आचार्य श्री विशाल चतुर्विध संघ की सेवा में लगे है जिसमे विशेष रूप से अनुज जैन वहलना वाले, अश्वनी जैन, सचिन जैन बजाज, मुकेश जैन (मीनू), अजय जैन, विपिन जैन नावला ,प्रवीण जैन हुंडई, सिद्धान्त जैन कवाल वाले, पंकज जैन गांधी टैंट, आदि काफी संख्या में लोग तन मन धन से सेवा में लगे रहे।
