अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुद्रास्फीति संशोधित आंकड़ों के अनुसार भारत ने पिछले दशक में 77 फीसदी की असाधारण GDP वृद्धि दर्ज की है। नॉमिनल जीडीपी की बात करें तो यह वृद्धि और भी प्रभावशाली है, 2.1 ट्रिलियन डॉलर से 4.3 ट्रिलियन डॉलर तक की यानी कुल 105 फीसदी की वृद्धि जो विश्व की सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक है। भारत वृद्धि के मामले में दुनिया में प्रथम स्थान रखता है.
यह ऐतिहासिक वृद्धि भारत को विश्व की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर चुकी है, ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए भारत अब 2025 में जापान और 2027 तक जर्मनी को पछाड़ने की स्थिति में है। वहीं देखें तो चीन ने इसी अवधि में 74 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है जबकि अमेरिका सिर्फ 28% की वृद्धि कर पाया।
यह अद्भुत उपलब्धि संयोग नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू की गई रणनीतिक नीतियों और सुधारों का परिणाम है। नीचे दिए गए हैं वह 12 प्रमुख कारण जिन्होंने भारत की इस ऐतिहासिक आर्थिक प्रगति में भूमिका निभाई:
पहला है वित्तीय समावेशन और अर्थव्यवस्था का औपचारिकरण। प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY), मुद्रा योजना, स्टैंड अप इंडिया, डिजिटल इंडिया, UPI, आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (AePS), बैंकिंग संवाददाताओं का विस्तार, पीएम स्वनिधि, स्मॉल फाइनेंस और पेमेंट बैंक, पीएम ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA), और DBT जैसी योजनाओं ने करोड़ों लोगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा। पहले जो समानांतर अर्थव्यवस्था अदृश्य थी, अब वह आंकड़ों में दर्ज हुई और GDP में शामिल हुई।
दूसरा है नोटबंदी और डिजिटल अपनाने का अनुशासित कार्यक्रम। 2016 की नोटबंदी ने डिजिटल भुगतान को मजबूती दी, टैक्स अनुपालन बढ़ाया और कैश इकोनॉमी को औपचारिक किया। इससे अनौपचारिक आर्थिक गतिविधियां मुख्यधारा में आईं। यदि नोटबंदी नहीं होती तो भारत आज इस स्तर की डिजिटल और वित्तीय एकीकरण में पीछे रह जाता।
तीसरा है एकीकृत GST का लागू होना. GST ने भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को एकीकृत और सरलीकृत किया जिससे एक भारत-एक बाज़ार बना। इससे निवेश बढ़ा, व्यापार में सुगमता आई और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं घटीं। निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।
चौथा है कोविड-19 के दौरान लचीलापन और आत्मनिर्भरता। कोरोना संकट में भारत की रणनीतिक और सक्रिय प्रतिक्रिया, आत्मनिर्भर भारत का आह्वान और लोगों की लचीलापन ने भारत को शीघ्र आर्थिक पुनःगठन में मदद की। लागत दक्षता बढ़ी और आत्मनिर्भरता का भाव जगा।
पांचवा है MSME सेक्टर को मजबूती। MSME के लिए आसान ऋण, समय पर भुगतान और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने वाली योजनाओं ने ग्रामीण भारत और छोटे उद्यमों को ताकत दी। इससे रोजगार बढ़ा और GDP में सीधा योगदान मिला।
छठा है व्यापार सुगमता और डिजिटल गवर्नेंस। कंपनी रजिस्ट्रेशन से लेकर सिंगल विंडो पोर्टल तक सरकार के डिजिटल कदमों ने व्यापार शुरू करना और चलाना बेहद आसान कर दिया। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा और देश में निवेश बढ़ा।
सांतवां हैं प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद और निवेशक सम्मेलन। मोदी के नेतृत्व में राज्यों में निवेश के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा शुरू हुई। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एक नया निवेश गंतव्य बनकर उभरा। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक पार्क ने सप्लाई चेन की बाधाएं दूर कीं।
आठवां है धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का लाभ. कुंभ जैसे आयोजनों और सनातन संस्कृति व धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर इसे आर्थिक इंजन में बदला गया। इससे टूरिज्म और सर्विस सेक्टर में बड़ा योगदान मिला।
नवां है अभूतपूर्व इंफ्रास्ट्रक्चर विकास। हवाई अड्डे, एक्सप्रेसवे, मेट्रो, ब्रिज, सी लिंक, सुरंगें और बंदरगाह जैसे बड़े बुनियादी ढांचे विकसित हुए, जिससे व्यापार में तेजी आई और वैश्विक निवेशकों को आकर्षित किया।
दसवां है ग्रामीण आपूर्ति श्रृंखला और इंफ्रा विकास। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP), गोदाम निर्माण, पोस्ट ऑफिस को कार्गो हब में बदलने जैसी योजनाओं ने ग्रामीण भारत को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ा।
ग्यारहवां है विनिर्माण, कर सुधार और नीतिगत बदलाव। PLI स्कीम, मैन्युफैक्चरिंग के लिए 15% कॉर्पोरेट टैक्स, कस्टम और औद्योगिक नीति में सुधारों ने भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया। IBC जैसे कानूनों ने विवाद निपटान में मदद की।
बारहवां है किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण। PM किसान, फसल बीमा, पेंशन योजना, MNREGA और DBT जैसी योजनाओं ने किसानों की आय बढ़ाई और उन्हें सशक्त बनाया। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई और उपभोग बढ़ा।
भारत की असाधारण GDP वृद्धि का यह सफर व्यापक रणनीति, मजबूत नेतृत्व और जमीनी स्तर के सुधारों का परिणाम है। मोदी सरकार की दूरदर्शी नीतियों और जनता की दृढ़ इच्छाशक्ति ने भारत को विश्व के सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यस्थाओं में स्थापित कर दिया है।
भारत अब सिर्फ प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहा, बल्कि समावेशी और सतत विकास के नए वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है।
-पंकज जायसवाल
(मुंबई स्थित अर्थशास्त्री)