दहेज के खिलाफ एक और युवक ने बनाई मिसाल, बागपत में दूल्हे ने लौटाया 21 लाख का चेक, मुज़फ्फरनगर में भी 31 लाख की पेशकश थी ठुकराई
बागपत/मुज़फ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से दहेज प्रथा के खिलाफ दो मजबूत संदेश सामने आए हैं। बागपत और मुज़फ्फरनगर के दो युवकों ने समाज के सामने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने लोगों के दिल जीत लिए हैं।
बागपत: सगाई समारोह में दूल्हे ने लौटाया 21 लाख का चेक
बागपत के बड़ौत कस्बे में रक्षित राणा नाम के युवक ने सगाई समारोह के दौरान दहेज के रूप में दिए जा रहे 21 लाख रुपये के चेक को सबके सामने लौटा दिया।
सगाई दिल्ली की दिव्या से तय हुई थी। तिलक में लड़की पक्ष द्वारा चेक देने पर रक्षित राणा ने माइक पर कहा—
“मैं दहेज नहीं लूंगा, यह समाज के लिए अभिशाप है।”
इस कदम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग रक्षित को “रियल लाइफ हीरो” बताते हुए सराहना कर रहे हैं।
मुज़फ्फरनगर के नगवा गांव के युवक ने भी शादी में 31 लाख रुपये लेने से किया इनकार
मुज़फ्फरनगर की बुढ़ाना तहसील के नगवा गांव के अवधेश सिंह (26) ने भी अपनी शादी में दुल्हन पक्ष द्वारा भेंट किए जा रहे ₹31 लाख रुपये को लेने से साफ इनकार कर दिया था ।
शहाबुद्दीनपुर गांव की अदिति सिंह (25) से विवाह के दौरान, अदिति के परिजनों ने राशि को एक थाली में सजाकर पेश किया था। अवधेश ने हाथ जोड़कर थाली लौटा दी और कहा—
“इस रकम पर मेरा कोई हक नहीं है। यह दुल्हन के पिता की कमाई है, इसे वापस रखिए।”
परिजन हुए भावुक, दूल्हे को दी दुआएँ
दुल्हन के नाना और मामा अवधेश के इस निर्णय से भावुक हो उठे और उन्होंने हाथ जोड़कर दूल्हे को धन्यवाद दिया था ।
अदिति के पिता का निधन कोरोना काल में हो गया था और पिछले पाँच वर्षों से उनकी देखभाल नाना सुखपाल और मामा कर रहे थे। नाना ने ही कन्यादान की रस्म निभाई थी ।
अवधेश हरवीर राणा के पुत्र हैं, जिनका परिवार बुढ़ाना की घास मंडी में “गोगा जी ट्रेडर्स” के नाम से पतंजलि प्रोडक्ट्स का होलसेल व्यापार करता है।
दूल्हे के माता-पिता ने भी गर्व से बेटे के फैसले का समर्थन किया।
दुल्हन अदिति ने भी अपने पति की सोच की सराहना की। गांव के लोग कह रहे हैं—
“दमाद हो तो ऐसा।”
दोनों घटनाएँ बनीं मिसाल
बागपत और मुज़फ्फरनगर से आए ये उदाहरण दहेज प्रथा के विरुद्ध समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा दे रहे हैं।
लोगों का कहना है कि ऐसे युवा ही असली बदलाव की शुरुआत करते हैं।
