फतेहपुर में बड़ा सियासी घमासान: अखिलेश यादव पहुंचे मृतक लेखपाल के घर, 'सिस्टम की प्रताड़ना' का लगाया आरोप
परिजनों को 2 लाख की मदद, सरकार से ₹1 करोड़ व नौकरी की मांग; बोले- 'दोषी SDM नहीं बचेंगे'
फतेहपुर: उत्तर प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार देर शाम उस समय हलचल मच गई, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव अचानक फतेहपुर जिले के बिंदकी कोतवाली क्षेत्र स्थित खजुहा कस्बे पहुंचे। उन्होंने हाल ही में मृतक लेखपाल सुधीर कुमार के घर जाकर उनके परिजनों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी।
परिजनों को सांत्वना और आर्थिक मदद
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मृतक लेखपाल सुधीर कुमार की माँ और बहन से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने परिवार को दो लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की।
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₹1 करोड़ की मांग: अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार से मृतक परिवार के लिए एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की अपील की है।
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न्याय का भरोसा: उन्होंने परिवार को भरोसा दिया कि सपा इस लड़ाई में उनके साथ खड़ी है और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
'यह मौत हादसा नहीं, सिस्टम की लापरवाही है'
मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव ने इस घटना को मात्र हादसा मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोला।
"यह मौत किसी हादसा का नतीजा नहीं है, यह सीधे तौर पर सिस्टम की लापरवाही और अफसरों की प्रताड़ना का नतीजा है। यह लड़ाई पूरे प्रदेश के कर्मचारियों की है। मैं परिवार को भरोसा दिलाता हूँ कि उपजिलाधिकारी बिन्दकी सहित जो भी दोषी अफसर हैं, वे अब नहीं बचेंगे।"
सपा प्रमुख ने कहा कि अधिकारी कर्मचारियों पर अनुचित दबाव डाल रहे हैं, जिसके कारण ऐसी दुःखद घटनाएँ हो रही हैं।
बीजेपी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
अखिलेश यादव ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए बीजेपी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
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वोट कटवाने की रणनीति: उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी हारने वाले बूथों पर वोट कटवाने की रणनीति बिहार में अपना चुकी है और अब यूपी में भी जल्दबाजी में गलत तरीके से एसआईआर (SIR) कराकर जनता को परेशान कर रही है।
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झूठ का सहारा: उन्होंने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार झूठ का सहारा ले रही है, जबकि सनातन सत्य पर अडिग रहता है।
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सपा मुखिया का अचानक फतेहपुर पहुंचना, इस घटना को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना गया है। उनकी यह यात्रा न केवल मृतक के परिवार को सांत्वना देने का प्रयास है, बल्कि सरकारी तंत्र के खिलाफ एक बड़ा विरोध दर्ज कराने का भी संकेत है।
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