देहरादून। तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ऐतिहासिक लड़ाई लड़ने वाली सायरा बानो को उत्तराखंड सरकार ने राज्य महिला आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए यह नियुक्ति की है।
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उत्तराखंड के किशनपुर, किच्छा (उधम सिंह नगर) की निवासी सायरा बानो ने तीन तलाक के खिलाफ 2016 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनकी इस पहल के बाद 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया और इसे प्रतिबंधित कर दिया गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने 2019 में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम लागू किया, जिसमें तीन तलाक को गैरकानूनी और दंडनीय अपराध माना गया।
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सायरा बानो सिर्फ तीन तलाक के मुद्दे तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक सुधारों के लिए भी लगातार काम किया। उनकी इसी सामाजिक सक्रियता और महिला अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने उन्हें राज्य महिला आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया।
राज्य सरकार के इस फैसले का महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सायरा बानो का अनुभव और योगदान राज्य की महिलाओं के सशक्तिकरण में सहायक होगा। राज्य महिला आयोग का कार्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है, और सायरा बानो इस दिशा में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं।
सायरा बानो उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले की रहने वाली हैं। उनकी शादी 2001 में हुई थी, लेकिन 2015 में पति ने उन्हें अचानक तीन तलाक दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपने अधिकारों की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी। उन्होंने कोर्ट में दलील दी थी कि तीन तलाक महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए। उनकी इस पहल से देशभर की मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिला और तीन तलाक कानून बन सका।