पेपर मिलों सहित औद्योगिक इकाइयों से लिए जाने वाले प्रदूषण संबंधी नमूनों में निष्पक्ष संस्था को किया जाए शामिल – धर्मेंद्र मलिक
मुज़फ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) द्वारा प्रदूषण के विरुद्ध चलाए जा रहे जन-जागरूकता अभियान के अंतर्गत कल चांदपुर गांव में एक नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया। सभा में ग्रामीणों ने प्रदूषण से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर खुलकर अपने विचार रखे। सभा की अध्यक्षता रामकुमार जी ने की तथा संचालन मोहित द्वारा किया गया।
सभा के दौरान एक बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि प्रशासन, औद्योगिक इकाइयों एवं नागरिक समूहों के बीच विश्वास की भारी कमी है। ग्रामीणों ने बताया कि जब भी प्रदूषण के विरुद्ध आवाज उठाई जाती है तो कुछ समय के लिए राख गिरना बंद हो जाती है, हवा कुछ साफ महसूस होती है, लेकिन थोड़े समय बाद स्थिति पुनः पूर्ववत हो जाती है। इसके बाद आवाज उठाने वाले नागरिकों को सामाजिक रूप से बदनाम किए जाने का प्रयास किया जाता है।
चांदपुर निवासी मांगेराम जी ने बताया कि पूर्व में स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव के पानी की जांच कराई गई थी, लेकिन पानी खराब होने के कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन करने के बजाय केवल नलकूपों पर लाल निशान लगाकर उन्हें बंद कर दिया गया। ग्रामीणों को रात में सोते समय बेचैनी होती है, सांस घुटने की समस्या रहती है तथा बच्चों में जन्मजात बीमारियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इस विषय पर कोई भी विभाग गंभीरता से विचार नहीं कर रहा। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में लोग पलायन को मजबूर होंगे।
सभा को संबोधित करते हुए भाकियू अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि यदि आज हम पर्यावरण के मुद्दे पर नहीं जागे तो कल हमारा भविष्य मौत के आगोश में होगा। आने वाली पीढ़ियां हमसे सवाल करेंगी कि उनकी हवा और पानी को जहरीला बनाने वालों के विरुद्ध हमने क्या किया।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से लोगों को हवा भारी लग रही है, खांसी बढ़ रही है और आंखों में जलन हो रही है। इसका एक बड़ा कारण मुज़फ्फरनगर की औद्योगिक इकाइयों द्वारा कचरा एवं RDF (Refuse Derived Fuel) का जलाया जाना है। जब यह कचरा जलता है तो उससे निकलने वाला जहरीला धुआं सीधे हमारे घरों, बच्चों के फेफड़ों और बुजुर्गों की सांसों तक पहुंचता है, जिससे गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार इससे बच्चों में दमा, बुजुर्गों में सांस की गंभीर बीमारियां तथा लंबे समय तक संपर्क में रहने से कैंसर तक का खतरा हो सकता है। कचरा जलाना कानूनन अपराध है और स्वच्छ हवा में सांस लेना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
धर्मेंद्र मलिक ने जिलाधिकारी महोदय से मांग की कि औद्योगिक इकाइयों से यदि कचरा, धुआं, जल, मिट्टी अथवा हवा के नमूने लिए जाते हैं तो उनकी प्रक्रिया में एक ऐसी निष्पक्ष एवं विश्वसनीय संस्था को नामित किया जाए, जिसकी उपस्थिति में ही नमूना संग्रह किया जाए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
इसके साथ ही जिला उद्योग अधिकारी से यह भी मांग की गई कि प्रत्येक औद्योगिक इकाई के बाहर स्पष्ट रूप से एक बोर्ड लगाया जाए, जिसमें प्रयोग होने वाले ईंधन, कच्चा माल, पानी की खपत एवं निकास की मात्रा, पर्यावरण से जुड़े वैज्ञानिक/अधिकारी का नाम आदि अंकित हो।
भाकियू अराजनैतिक ने प्रशासन से यह भी अपील की कि कूड़ा अथवा RDF जलाने वाली औद्योगिक इकाइयों को किस नियम के अंतर्गत अनुमति दी गई है, उससे संबंधित दिशा-निर्देश सार्वजनिक किए जाएं। संगठन का दावा है कि मुज़फ्फरनगर का उद्योग उस श्रेणी में नहीं आता जहां RDF जलाने की अनुमति हो। यदि यह दावा गलत है तो संबंधित उद्योग एवं विभाग साक्ष्य प्रस्तुत करें।
सभा में सुधीर पंवार, अंकित जावला, दुष्यंत, मांगेराम, कोकिल पंवार, भारत सिंह, जाबिर राणा, शहजाद राव, जयवीर ठाकरान, दीपक मलिक, मनीष तोमर, किशन सिंह, सुभाष चौधरी, रविन्द्र सिंह सहित सैकड़ों नागरिक उपस्थित रहे।
नागरिकों की आवाज़ का असर अब दिखने लगा है। भोपा रोड स्थित औद्योगिक इकाइयों से प्रदूषण विभाग द्वारा नमूने संग्रह किए गए हैं। इन इकाइयों के विरुद्ध शीघ्र ही बड़ी कार्यवाही की संभावना जताई जा रही है।
