रिमोट सेंसिंग व जीआईएस तकनीक से मिलेगी मुजफ्फरनगर के विकास कार्यों को गति: डीएम
मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी (DM) उमेश मिश्रा ने कहा है कि रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing) व जीआईएस (GIS - भौगोलिक सूचना तंत्र) तकनीक का उपयोग करके जनपद के विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से गति दी जा सकेगी। यह बात उन्होंने विकास भवन सभागार में रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन्स सेंटर, उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कही।
वैज्ञानिकों ने दी डिजिटल तकनीक की विस्तृत जानकारी
कार्यशाला में रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन्स सेंटर (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग) के विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण तकनीकों का प्रस्तुतीकरण दिया:
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प्रस्तुतीकरण: वरिष्ठ वैज्ञानिक अमित सिन्हा, नरेंद्र कुमार, परियोजना वैज्ञानिक डा. जय कुमार मिश्रा, और अवनीश कुमार श्रीवास्तव ने जनपदवार तैयार किए गए डिजिटल डाटाबेस का प्रस्तुतीकरण दिया।
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तकनीकी विवरण: उन्होंने बताया कि रिमोट सेंसिंग, जीआईएस और जीपीएस तकनीक का उपयोग करके डाटा कैसे जुटाया जाता है और उसका विश्लेषण कैसे किया जाता है।
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रिमोट सेंसिंग: यह दूर से, जैसे उपग्रहों या विमानों से, किसी वस्तु या क्षेत्र के बारे में जानकारी एकत्र करने की तकनीक है।
इन क्षेत्रों में होगा तकनीक का उपयोग
विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों का उपयोग सरकारी विभागों के कार्यों में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है, जिनमें शामिल हैं:
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कृषि और राजस्व
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भू-संचय (Land Acquisition) और जल-संचय (Water Conservation)
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प्राकृतिक आपदा प्रबंधन
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ग्राम्य विकास और पंचायती राज
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सिंचाई विभाग, जल निगम और नलकूप
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सड़क निर्माण और वन विभाग
लिडार और गतिशक्ति पोर्टल पर चर्चा
कार्यशाला में दो अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों और उपकरणों पर भी चर्चा की गई:
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लिडार (LiDAR) तकनीक: विशेषज्ञों ने लिडार (Light Detection and Ranging) तकनीक के बारे में जानकारी दी, जिसका उपयोग उच्च सटीकता वाले 3D मॉडल और ऊँचाई के डाटा (Elevation Data) बनाने के लिए किया जाता है।
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प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल (PM-GatiShakti Portal): इस पोर्टल के माध्यम से विभिन्न विभागों के डाटाबेस के एकीकरण और उपयोग के बारे में समझाया गया, जिससे अंतर-विभागीय समन्वय बेहतर हो सके और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को गति मिल सके।
इस कार्यशाला में जिला विकास अधिकारी, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, उप निदेशक कृषि, जिला पंचायत राज अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के अधिकारी, और समस्त खंड विकास अधिकारियों सहित कई महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
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