हरियाणा बैंक घोटाला: सीबीआई की चार्जशीट में 6 आईएएस के नाम, 3 पर गिरफ्तारी की तलवार
504 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में हरियाणा के तीन और आईएएस अधिकारियों की हो सकती है गिरफ्तारी
हरियाणा में 504 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने 03 सितंबर को चार्जशीट में छह आईएएस अधिकारियों के नाम शामिल किए हैं। तीन अधिकारियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है, जबकि तीन अन्य पर गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है।
चंडीगढ़: हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों भारी हलचल मची हुई है, क्योंकि बैंक घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी चार्जशीट में राज्य के छह वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के नाम शामिल किए हैं। इस बड़े खुलासे के बाद प्रदेश की अफसरशाही में हड़कंप मच गया है। सीबीआई इस मामले में पहले ही तीन आईएएस अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि चार्जशीट में नाम आने के बाद अब बाकी बचे तीन अन्य आईएएस अधिकारियों पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। गुरुवार को दिनभर चंडीगढ़ स्थित सचिवालय में इन अधिकारियों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। यह पहला मौका है जब सीबीआई ने किसी चार्जशीट में एक साथ छह आईएएस अधिकारियों के नाम दर्ज किए हैं।
504 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप
सीबीआई की जांच में एक बहुत बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी पैसे को नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर कुछ चुनिंदा बैंक शाखाओं में भेजा गया। इसके बाद इस पैसे को कई अलग-अलग खातों में घुमाया गया और अंत में नकदी यानी कैश में बदल दिया गया। सीबीआई ने दावा किया है कि इस पूरे खेल में कुल 504 करोड़ रुपये की भारी-भरकम हेराफेरी की गई है। इस घोटाले में शामिल अधिकारियों ने कथित तौर पर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया है।सीबीआई की इस चार्जशीट में जिन छह आईएएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं, उनमें 1991 बैच के आईएएस विनीत गर्ग, 2000 बैच के आईएएस पंकज अग्रवाल, 2002 बैच के आईएएस मोहम्मद शाइन, 2005 बैच के आईएएस साकेत कुमार, 2011 बैच के आईएएस प्रदीप कुमार और 2012 बैच के आईएएस राम कुमार सिंह का नाम मुख्य रूप से शामिल है। इन छह अधिकारियों में से तीन को सीबीआई पहले ही अपनी कस्टडी में ले चुकी है।
तीन आईएएस अधिकारियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
सीबीआई ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए तीन आईएएस अधिकारियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 2012 बैच के आईएएस राम कुमार सिंह को 18 जून को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद, 2000 बैच के आईएएस पंकज अग्रवाल को 22 जून को गिरफ्तार किया गया। वहीं, 2011 बैच के आईएएस प्रदीप कुमार को 1 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था। इन तीनों अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद से ही अन्य अधिकारियों में डर का माहौल बना हुआ है।
सीबीआई की जांच के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आईएएस राम कुमार सिंह उस समय पंचकूला नगर निगम के आयुक्त के पद पर तैनात थे, जब यह कथित घोटाला हुआ था। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान पंचकूला नगर निगम के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 चंडीगढ़ स्थित शाखा में मौजूद खाते से करीब 79.46 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी की गई थी। इस मामले में उनकी भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है।
विभागों के खातों से पैसे ट्रांसफर करने का खेल
दूसरे गिरफ्तार अधिकारी आईएएस पंकज अग्रवाल की भूमिका हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के बैंक खातों से जुड़े मामले में सामने आई है। वह उस समय स्कूल शिक्षा और कृषि विभाग के प्रधान सचिव के रूप में कार्यरत थे, जब इन दोनों सरकारी संस्थाओं के खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 चंडीगढ़ स्थित शाखा में खोले गए थे। सीबीआई का कहना है कि इन खातों को खोलने में वित्त विभाग के तय दिशा-निर्देशों का सीधे तौर पर उल्लंघन किया गया था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि इन दोनों संस्थाओं से जुड़े खातों से करीब 60.54 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी की गई थी।
तीसरे गिरफ्तार अधिकारी आईएएस प्रदीप कुमार उस समय हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव के पद पर तैनात थे, जब बोर्ड से संबंधित सरकारी पैसे की कथित हेराफेरी की गई थी। सीबीआई के अनुसार, प्रदीप कुमार की भूमिका हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उन सरकारी खातों और लेन-देन से जुड़ी जांच का हिस्सा है, जिनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 चंडीगढ़ शाखा के माध्यम से कथित तौर पर वित्तीय गड़बड़ी की गई थी।
आठ सरकारी विभागों के पैसे की हेराफेरी
सीबीआई की जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी सरकारी अधिकारियों ने बैंकों के अधिकारियों के साथ कथित तौर पर मिलीभगत की थी। इस मिलीभगत के जरिए ही सरकारी पैसे की हेराफेरी को अंजाम दिया गया। बताया जा रहा है कि हरियाणा सरकार के आठ अलग-अलग विभागों का पैसा, जो पहले से अधिकृत बैंकों में रखा हुआ था, उसे नियमों के खिलाफ जाकर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की कुछ चुनिंदा शाखाओं में ट्रांसफर कर दिया गया था।
सीबीआई की चार्जशीट में नाम आने के बाद अब इन सभी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना पूरी तरह तय माना जा रहा है। हरियाणा सरकार अब इन छह आईएएस अधिकारियों के खिलाफ अदालत में केस चलाने के लिए केंद्र सरकार से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत मंजूरी मांगने की तैयारी कर रही है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी पर भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी के मामले में अदालत में मुकदमा शुरू करने से पहले संबंधित सरकार या विभाग से औपचारिक अनुमति लेना अनिवार्य होता है। राज्य सरकार के एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, अभी हरियाणा सरकार ने केंद्र को इसके लिए आवेदन नहीं भेजा है। इस आवेदन पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार का डीओपीटी विभाग लेगा।
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