भाजपा के दो दिग्गज एक फ्रेम में: मजबूरी की मुस्कान या नई शुरुआत: भूपेंद्र–गोविंद की दो साल पुरानी तकरार पर उठे सवाल?
Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के सागर जिले में ऐसा राजनीतिक दृश्य सामने आया जिसे स्थानीय कार्यकर्ताओं ने ‘चमत्कार’ बताया। भाजपा के दो दिग्गज- मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह- जो पिछले दो वर्षों से एक-दूसरे से बिल्कुल अलग-थलग चल रहे थे, अचानक एक ही मेज पर चाय पीते और बातचीत करते हुए दिखे। महीनों से जिन्हें एक-दूसरे की गली तक घूमते नहीं देखा गया था, वे एक साथ बैठे दिखे।
प्रोटोकॉल की मजबूरी या रिश्तों की मरम्मत?
मंच से सोशल मीडिया तक फैली तल्खियों की लंबी कहानी
भूपेंद्र और गोविंद के बीच बढ़ती राजनीतिक दूरी कोई एक दिन की बात नहीं। जैसीनगर का नाम बदलकर जय शिवनगर करने का मुद्दा दोनों के रिश्तों में खटास का बड़ा कारण बना। इसके बाद राजपूत का यह बयान कि “सुरखी में दस साल क्या किया?”, और भूपेंद्र सिंह की दीपावली मिलन वाली टिप्पणी ने आग में घी डाल दिया। उनके समर्थक भी दो साल से सोशल मीडिया पर मानो ‘अनऑफिशियल वॉर’ लड़ते रहे।
मुस्कुराहटें तो आईं, पर क्या भरोसा लौटेगा?
खबरों के मुताबिक, हेमंत खंडेलवाल ने सागर पहुंचने से पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जिले में अंदरूनी मतभेद दिखना नहीं चाहिए। इसी दबाव में दोनों गुटों ने एक-दूसरे के घर जाकर खाने का ‘पब्लिक जेस्चर’ दिखाया। तस्वीरें मुस्कुराहटों से भरी हैं, लेकिन स्थानीय राजनीतिक जानकारों का कहना है-“राजनीति में भरोसा फोटो से नहीं, व्यवहार से बनता है।” इसलिए कई कार्यकर्ता अब भी सवाल कर रहे हैं यह नजदीकी कितने दिन चलेगी? अगली बयानबाज़ी तक या अगले विवाद तक?
