मध्य प्रदेश में दोहरे मानदंडों पर बवाल: विजय शाह के बाद संतोष वर्मा पर भी कार्रवाई लटकी, सरकार पर वोटबैंक के आरोप तेज
Madhya Pradesh News : मध्य प्रदेश में विवादित बयानों पर कार्रवाई को लेकर सरकार के दोहरे मानदंडों पर सवाल उठ रहे हैं। जिस तरह ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी सैन्य अधिकारी सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बावजूद मंत्री विजय शाह पर कोई कदम नहीं उठाया गया, ठीक उसी तरह आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के मामले में भी सरकार कार्रवाई टाल रही है।
अजाक्स अध्यक्ष होने के कारण सरकार की हिचकिचाहट बढ़ी
ब्राह्मण समाज में तीखी नाराजगी
सामान्य प्रशासन विभाग ने संतोष वर्मा को नोटिस भेजा है, लेकिन आगे किसी कार्रवाई के संकेत नहीं दिख रहे। ब्राह्मण समाज ने इसे अपमानजनक बताया और चेतावनी दी है कि यदि एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो आंदोलन प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी जाएगा।
पुलिस भी निर्देशों की प्रतीक्षा में
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, वरिष्ठ भाजपा नेता गोपाल भार्गव समेत कई संगठनों ने संतोष की टिप्पणी को अनुचित बताया है। लेकिन इसके बावजूद पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही। सूत्रों का दावा है कि प्रशासन सरकार के स्पष्ट संकेत का इंतजार कर रहा है।
आदिवासी वोटबैंक का दबदबा
संतोष वर्मा आदिवासी वर्ग से आते हैं, जो मध्य प्रदेश की 21.9% आबादी है। विधानसभा की 47 सीटें और लोकसभा की 6 सीटें इस वर्ग के लिए सुरक्षित हैं। कुल 80 से अधिक विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां आदिवासी मतदाता परिणाम बदल सकते हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इस वर्ग को नाराज नहीं करना चाहते।
वोट बैंक का गणित भारी
वोटबैंक की राजनीति के चलते कांग्रेस ने संतोष वर्मा के खिलाफ कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार तक ने खामोशी साध रखी है। स्पष्ट है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अजाक्स से जुड़े संवेदनशील विवाद को तूल नहीं देना चाह रहे हैं।
