परिश्रम, पवित्र कमाई और विनम्रता से ही जीवन धन्य बनता है
जीवन में ईमानदारी, परिश्रम और पवित्र कमाई के महत्व को उजागर करते हुए सामाजिक एवं धार्मिक संदेश देते संत-महात्माओं ने कहा कि मनुष्य को कभी भी दूसरे का हक छीनकर नहीं खाना चाहिए। परिश्रम और निष्ठा से प्राप्त कमाई को भगवान का प्रसाद मानकर ग्रहण करना चाहिए। कहा गया कि अन्न को ब्रह्म कहा गया है, इसलिए उसका सदैव सम्मान करें और किसी भी वस्तु का दुरुपयोग न होने दें।
संतों ने कहा कि भगवान के दर्शन, वचनों का श्रवण और उनके भक्तों की सेवा का अवसर मिले तो स्वयं को धन्य समझना चाहिए। जीवन में सदैव विनम्र बने रहें, अहंकार से दूर रहें और वाणी में मधुरता बनाए रखें, क्योंकि विनम्रता में ही ईश्वर की कृपा बसती है।
संदेश में यह भी कहा गया कि भगवान पर हमेशा भरोसा रखें, क्योंकि वह किसी को निराश नहीं करता। "रात होते ही सबके दरवाज़े बंद हो जाते हैं, लेकिन भगवान का दरबार सदैव खुला रहता है।" ईश्वर के प्रति प्रेम इतना जागृत करें कि हर स्थान पर, हर समय उनका सान्निध्य महसूस हो सके।
