मुंबई। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर देशभर में विवाद और चर्चा जारी है। इस बीच, एनसीपी (शरद पवार) के नेता जितेंद्र आव्हाड ने इस विधेयक का विरोध करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। जितेंद्र आव्हाड ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि अभी सरकार मुसलमानों के साथ ऐसा बर्ताव कर रही है। इनका अगला निशाना ईसाई और दलित हैं। उन्होंने वक्फ का समर्थन करते हुए कहा कि वक्फ का मतलब किसी धर्मार्थ उद्देश्य के लिए दान देना है और इस दान का उपयोग समाज के हित में होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मुंबई में एक जमीन का मामला उनके पास आया था, जिसे वक्फ से जोड़ने की कोशिश की गई थी, लेकिन उन्होंने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि वक्फ की जमीन समाज के कल्याण के लिए होनी चाहिए।
यह जमीन किसी की नहीं हो सकती। यह किसी मुसलमान या किसी एक व्यक्ति की हो ही नहीं सकती। वक्फ इसका इस्तेमाल मुसलमानों के हित के लिए करता है। यह जमीन मुसलमानों के बाप-दादाओं ने दान दी है। तो इसका इस्तेमाल उन्हीं की तालीम के लिए होना चाहिए। कोई गलत करता है तो उसे जेल में डालो। आव्हाड ने यह भी कहा कि देश में कई ऐतिहासिक स्थल और जमीनें वक्फ की हैं, जैसे दिल्ली में हुमायूं का मकबरा और लाल किला, जिनकी जमीन वक्फ के अधीन है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस तरह की जमीनों को अपने नियंत्रण में लेगी, तो भविष्य में ताजमहल जैसी धरोहरों को भी किसी और उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। वक्फ की जमीन वक्फ के पास रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस कदम को बढ़ाती है, तो यह सिर्फ मुसलमानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में यह अन्य समुदायों जैसे पारसी, जैन और दलितों के लिए भी खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से समाज में असंतोष पैदा होगा और इसका असर पूरे देश में महसूस किया जाएगा।