
नोटिस मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। उनका कहना है कि उन्होंने कोई हिंसा या उकसावे की कोशिश नहीं की। हमारे मदरसे में 4-5 हजार लोग नमाज पढ़ते हैं, लेकिन मुझे नहीं पता कि किसने काली पट्टी बांधी। हमारा काम बच्चों को तालीम देना है, वक्फ बिल से हमारा कोई लेना-देना नहीं।“
मोहम्मद शब्बीर ने भी कहा कि हमें व्हाट्सएप पर आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का मैसेज मिला था कि काली पट्टी बांधकर विरोध जताएं। हमने खामोशी से ऐसा किया, फिर भी नोटिस मिला।“ उनका आरोप है कि ये कार्रवाई उनकी अभिव्यक्ति को दबाने की कोशिश है।
आपको बता दे कि पिछले हफ्ते से मुजफ्फरनगर में मुस्लिम समुदाय ने मस्जिदों और मदरसों में काली पट्टी बांधकर वक्फ बिल का विरोध किया था। प्रशासन का मानना है कि ये शांति व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे अपना अधिकार बताते हैं।प्रशासन ने इन्हें 16 अप्रैल 2025 को कोर्ट में पेश होने और दो लाख रुपये का मुचलका पाबंद करने निर्देश दिया है जिससे मुस्लिम समाज में हड़कंप मचा हुआ है।